भिलाई

BSP में बदलाव! आयरन ओर उत्खनन महंगा, दल्ली राजहरा से रावघाट की ओर शिफ्ट हो रहा फोकस

BSP Update: बीएसपी के लिए वर्षों तक प्रमुख स्रोत रही दल्ली राजहरा माइंस अब महंगी पड़ रही है। बढ़ती उत्खनन लागत और खदान की गहराई के कारण आयरन ओर निकालना महंगा हो गया है।

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May 01, 2026
BSP में बदलाव! आयरन ओर उत्खनन महंगा, दल्ली राजहरा से रावघाट की ओर शिफ्ट हो रहा फोकस(photo-patrika)

BSP Update: छत्तीसगढ़ के भिलाई स्टील प्लांट (बीएसपी) के लिए वर्षों तक प्रमुख स्रोत रही दल्ली राजहरा माइंस अब पहले जैसी प्राथमिकता में नहीं रह गई है। खदानों की बढ़ती गहराई और उत्खनन लागत में लगातार इजाफा होने से यहां से आयरन ओर निकालना महंगा होता जा रहा है। यही वजह है कि बीएसपी प्रबंधन का फोकस अब रावघाट परियोजना की ओर तेजी से शिफ्ट हो रहा है।

BSP Update: परियोजना ने पकड़ी रफ्तार

रावघाट परियोजना के तहत दिसंबर 2021 में अंजरेल क्षेत्र से खनन शुरू किया गया था। खनन शुरू होने के करीब 10 माह बाद 11 सितंबर 2022 को पहला रेक भिलाई पहुंचा। अंजरेल से अंतागढ़ तक 50 किलोमीटर सडक़ मार्ग और वहां से करीब 150 किलोमीटर रेल मार्ग के जरिए आयरन ओर प्लांट तक पहुंचाया गया।

67 साल का भरोसा

अब चुनौती के दौर में दल्ली राजहरा माइंस ने बीएसपी को 67 वर्षों तक निरंतर आयरन ओर की आपूर्ति दी है। आज भी प्रतिदिन औसतन 7 रेक आयरन ओर यहां से प्लांट पहुंच रहा है। हालांकि बदलती परिस्थितियों में इसकी उपयोगिता पर सवाल खड़े होने लगे हैं।

लागत बढऩे से बदला फोकस

वित्तीय वर्ष 2022-23 में जहां आयरन ओर उत्पादन की औसत लागत 1946 रुपए प्रति टन थी, वहीं 2025-26 में यह बढक़र 2792.47 रुपए प्रति टन पहुंच गई है। लागत में इस वृद्धि के पीछे राज्य सरकार को दी जाने वाली अतिरिक्त रॉयल्टी प्रमुख कारण बताई जा रही है। इससे दल्ली राजहरा माइंस से उत्पादन आर्थिक रूप से कम आकर्षक होता जा रहा है।

रावघाट से मिलने लगा विकल्प

बीएसपी को दल्ली राजहरा से सालाना लगभग 32 लाख टन आयरन ओर मिल रहा है, जबकि रावघाट से भी अब करीब 7 लाख टन आपूर्ति शुरू हो चुकी है। कुल मिलाकर प्लांट को सालाना लगभग 39 लाख टन आयरन ओर प्राप्त हो रहा है, इसके अलावा करीब 45 लाख टन फाइंस भी मिल रहा है। रावघाट का आयरन ओर 62 प्रतिशत तक उच्च लौह अंश वाला है, जिससे उत्पादन लागत घटने की उम्मीद है।

खनन में मासिक उतार-चढ़ाव

वित्त वर्ष 2025-26 में दल्ली राजहरा और रावघाट से आयरन ओर उत्पादन में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। जहां राजहरा क्षेत्र से उत्पादन अपेक्षाकृत स्थिर रहा, वहीं रावघाट से धीरे-धीरे उत्पादन बढ़ता नजर आ रहा है, जो भविष्य में इसकी बढ़ती भूमिका का संकेत है।

आयरन ओर खनन का मासिक आंकड़ा (टन में)
अप्रैल राजहरा 1,00,000 1,50,000 रावघाट 90,000
मई राजहरा 1,00,000 1,20,000 रावघाट 90,000
जून राजहरा 1,00,000 1,50,000 रावघाट 90,000
जुलाई राजहरा 1,20,000 1,50,000 रावघाट 40,000
अगस्त राजहरा 80,000 1,40,000 रावघाट 50,000
सितंबर राजहरा 1,10,000 1,60,000 रावघाट 26,000
अक्टूबर राजहरा 1,10,000 1,20,000 रावघाट 34,000
नवंबर राजहरा 90,000 1,50,000 रावघाट 43,000
दिसंबर राजहरा 85,000 1,80,000 रावघाट 61,000
जनवरी राजहरा 87,000 1,70,000 रावघाट 63,000
फरवरी राजहरा 89,000 1,80,000 रावघाट 74,000
मार्च राजहरा 1,00,000 2,24,000 रावघाट 83,000

भिलाई स्टील प्लांट की दीर्घकालीन आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए प्रबंधन का फोकस रावघाट की खदानों पर है, ताकि उत्पादन की प्रक्रिया अनवरत चलती रहे। साल भर के आंकड़ों से स्पष्ट है कि राजहरा क्षेत्र से उत्पादन अपेक्षाकृत स्थिर रहा, जबकि रावघाट से शुरुआत में कम उत्पादन के बाद धीरे-धीरे वृद्धि दर्ज की गई। मार्च तक रावघाट का उत्पादन 83,000 टन तक पहुंचना भविष्य में इसकी बढ़ती भूमिका का संकेत देता है।

Updated on:
01 May 2026 02:06 pm
Published on:
01 May 2026 01:59 pm
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