तेज हवा और बारिश में 14 लाख 20 हजार रुपए खर्च कर लगाया ग्रीन हाउस ध्वस्त हो गया। किसान ने कंपनी के खिलाफ परिवाद प्रस्तुत किया था।
दुर्ग . तेज हवा और बारिश में 14 लाख 20 हजार रुपए खर्च कर लगाया ग्रीन हाउस ध्वस्त हो गया। जिला उपभोक्ता फोरम ने ग्रीन हाउस तैयार करने वाली वालवोड़ गुजरात की किसान एग्रोटेक कंपनी को सेवा में कमी का दोषी ठहराया। फोरम के आदेश पर इस कंपनी को ग्रीन हाउस बनाने के लिए किसान से ली गई राशि 14.20 लाख को एक माह के भीतर ब्याज सहित लौटाना होगी। इसके अलावा कंपनी पांच हजार वाद व्यय भी देगी। इस मामले में चिखली (बेमेतरा) के किसान जीवनलाल वर्मा ने कंपनी के खिलाफ परिवाद प्रस्तुत किया था। सुनवाई के बाद यह फैसला जिला उपभोक्ता फोरम ने सुनाया।
50 फीसदी छूट बताया तब बनवाया था ग्रीन हाउस
परिवाद के मुताबिक जीवन लाल वर्मा ने शासन की योजना के तहत अपने खेत में ग्रीन हाउस तैयार कराया था। ग्रीन हाउस तैयार करने छत्तीसगढ़ शासन के राष्ट्रीय बागवानी मिशन ने गुजरात की किसान एग्रोटेक कंपनी को अधिकृत किया था। इस संस्थान से ग्रीन हाउस तैयार कराने पर ५० प्रतिशत अनुदान का प्रवधान था। जिसके तहत ४००० वर्गफीट में ग्रीन हाउस तैयार करने पर कुल खर्च २८ लाख ४० हजाप रुपए आया। पचास फीसदी छूट के मुताबिक किसान ने ग्रीन हाउस तैयार करने के एवज में १४.२० लाख रुपए का भुगतान किया था। शेष राशि को योजना के तहत शासन ने भुगतान किया। यह ग्रीन हाउस कुछ माह बाद ही तेज आंधी तूफान में धराशयी हो गया।
फिर से लगाने किसान का अनुरोध नहीं माना
परिवादी जीवनलाल वर्मा ने कहा कि ग्रीन हाउस के धराशायी होने की विधिवत सूचना उन्होंने २३ मई, २८ मई और ३ जून २०१५ को दी थी। ग्रीन हाउस का निर्माण फिर से करने का अनुरोध किया। ग्रीन हाउस बनाने वाली संस्था ने उनके अनुरोध को नामंजूर कर दिया।
कंपनी ने किसान को ही ठहराया जिम्मेदार
सुनवाई के दौरान किसान एग्रोटेक ने बचाव में कहा कि ग्रीन हाउस तैयार करते समय परिवादी ने अपनी आर्थिक स्थिति कमजोर होने का हवाला देते कहा था कि अनुदान राशि मिलने के बाद वह एकमुश्त राशि २८.४० लाख रुपए देगा। बाद में आवेदक ने सिर्फ १४.२० लाख का भुगतान किया। शेष राशि उसे अब तक अप्राप्त है। ग्रीन हाउस तैयार होने के बाद रखरखाव के बारे में बताया गया था। ग्रीन हाउस का गेट हमेशा बंद रखने और नेट को मिट्टी में दबाकर रखने कहा था, लेकिन आवेदक ने ऐसा नहीं किया। फोरम ने संस्थान के इस तर्क को खारिज कर दिया।