ब्रोकर महावीर खुदकुशी मामले में आरोपी बनाए गए शहर के तीनों उद्योगपतियों की जमानत याचिका पर प्रकरण को अन्य बेंच में रखने कहा।
राजनांदगांव. ब्रोकर महावीर चौरडिय़ा की खुदकुशी के चर्चित मामले में आरोपी बनाए गए शहर के तीनों उद्योगपतियों की जमानत याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय के न्यायाधीश राजेन्द्र चंद्र सिंग सामंत ने प्रकरण को किसी अन्य ऐसे बेंच में सुनवाई के लिए रखने कहा है, जिस बेंच में वे सदस्य नहीं होंगे। अब हाईकोर्ट के दूसरे बेंच में रखे जाने के बाद ही इस मामले में सुनवाई होगी।
रेलवे ट्रेक पर ही खड़े होकर आडियो रिकार्ड किया था
उल्लेखनीय है कि मनी लांड्रिंग से जुड़े शहर के कामठी लाइन निवासी ब्रोकर महावीर चौरडिय़ा ने १० फरवरी की रात शहर के तीन उद्योगपतियों पर परेशान करने का आरोप लगाते हुए ट्रेन से कटकर खुदकुशी कर ली थी। खुदकुशी के पूर्व चौरडिय़ा ने रेलवे ट्रेक पर ही खड़े होकर एक आडियो रिकार्ड किया था जिसमें उसने शहर के तीन उद्योगपतियों से परेशान होने की बात की थी। उसने अपने आडियो में धनलक्ष्मी पेपर मिल के मालिक विनोद लोहिया, उसके भाई अशोक लोहिया और कमल साल्वेंट के कमल मूंदड़ा का नाम लिया था।
जिले में पहले हो गई है निरस्त
कोतवाली थाना में दर्ज अपराध क्रमांक ९२/१८ के अंतर्गत धारा ३०६/३४ के मामले में आरोपी बनाए गए धनलक्ष्मी पेपर मिल के विनोद लोहिया और उसके भाई अशोक लोहिया द्वारा प्रस्तुत की गई जमानत याचिका को जिला एवं सत्र न्यायाधीश निर्मल मिंज ने निरस्त कर दिया था। इसके बाद कमल मूंदड़ा की याचिका भी निरस्त कर दी गई थी। इसके बाद तीनों ने अलग अलग याचिका हाईकोर्ट में लगाई थी।
सुसाइडल नोट में दो नाम
इसके अलावा महावीर ने एक सुसाइडल नोट छोड़ा था, जिसमें उसने विनोद लोहिया और उसके भाई अशोक लोहिया का नाम प्रताडि़त करने वालों में लिया था। इस मामले में पुलिस ने खुदकुशी के लिए उकसाने की धारा ३०६ का मामला तीनों उद्योगपतियों पर दर्ज किया था। घटना के बाद से तीनों फरार हैं और पुलिस जांच कर रही है।
पहले एक साथ किया
हाईकोर्ट के न्यायाधीश राजेन्द्र चंद्र सिंग सामंत ने इससे पहले १७ अप्रैल को कमल मूंदड़ा की जमानत याचिका को लेकर निर्णय दिया था कि इसी से संबंधित मामले में दो लोगों की याचिका पर २० अप्रैल को सुनवाई है, ऐसे में इसे भी उसी के साथ सुनवाई के लिए रखा जाए। शुक्रवार २० अप्रैल को न्यायाधीश ने इस मामले को किसी दूसरे ऐसे बेंच में रखे जाने कहा है, जिसमें वे सदस्य न हों।पहले एक