भिलाई

Online Payment: ऑनलाइन पेमेंट से व्यापार में हो रही बढ़ोत्तरी, समय की हो रही बचत, बैंकों में घटी भीड़…

Online Payment: कारोबार करने वाले एक व्यापारी ने बताया कि पहले कालोनियों में व्यापार के दौरान उधारी का झंझट होता था लेकिन क्यूआर कोड लगाने से बहुत हद तक इससे राहत मिली है।
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Aug 29, 2024
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Online Payment: क्यूआर कोड स्कैन किया और हो गई पेमेंट… बैंक जाए बिना एक लाख तक का फंड ट्रांसफर भी चुटकियों में। यूपीआई की वजह से बैंकों का लोड 50 फीसदी तक कम हो गया है। अकेले दुर्ग जिले में ही छोटे व मझले दुकानदारों से लेकर ढेले खोमचे वालों तक हर किसी के पास अब यूपीआई की सुविधा ने जहां कारोबार का ट्रेंड बदला है, वहीं ग्राहक के लिए आसानी कर दी है।

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ताजा आंकड़ोें के मुताबिक दुर्ग जिले में तकरीबन 1.73 लाख यूपीआई क्यूआर एक्टिव हैं, जिनकी मदद से रोजाना दो करोड़ से ज्यादा का ट्रांजेक्शन सिर्फ छोटे व मझले दुकानदार कर रहे हैं। बड़े शोरूम और दुकानों का ये आंकड़ा इससे दोगुना है।

चिल्हर और उधार का झंझट खत्म

सुपेला स्थित लक्ष्मी मार्केट के एक सब्जी कारोबारी ने बताया कि क्यूआर स्कैनर से व्यापार में आसानी हुई है। चिल्हर नहीं होने पर पहले जो ग्राहक अन्य दुकानों पर रुख कर लेता था, वह अब झट से ई-पेमेंट कर अपना समय बचाता है। ठीक ऐसे ही हाथ ठेले पर कारोबार करने वाले एक व्यापारी ने बताया कि पहले कालोनियों में व्यापार के दौरान उधारी का झंझट होता था लेकिन क्यूआर कोड लगाने से बहुत हद तक इससे राहत मिली है।

बैंकों में घटी भीड़

छत्तीसगढ़ स्टेट लेवल बैंकिंग कमेटी के मैनेजर राजन शाह ने बताया कि छोटे फंड ट्रांसफर के लिए बैंकों में आने वाली भीड़ अब 60 फीसदी तक घट गई है। हालांकि बैंक ग्रीन चैनल की मदद से पैसा विड्राल करने की सुविधा देता है। ऐसे लोग जिन्हें एटीएम से पैसा निकालने में दिक्कत आती है या वे तकनीकी तौर पर इसे आसान नहीं मानते उनके लिए बैंक ग्रीन चैनल के जरिए विड्राल की सुविधा देे रहा है।

शहर के बाजारों में कारोबारियों और ग्राहक दोनों के पास ही निजी कंपनियों के क्यूआर पेमेंट ऐप मौजूद हैं। जबकि भीम ऐप को लोगों ने नापसंद कर दिया है। एक तरह से सरकारी ऐप या सर्विस होने की वजह से इसकी ब्रान्डिंग ठीक तरह से नहीं हो पाई। लिहाजा, चुनिंदा लोग ही इसका इस्तेमाल कर रहे हैं।

Updated on:
29 Aug 2024 02:39 pm
Published on:
29 Aug 2024 02:39 pm