ब्रजमंडल भिलाई के गीता भवन परिसर में चल रही श्रीरामकथा ज्ञान यज्ञ के चौथे दिन कथावाचक सुनील महाराज ने कहा कि भाव के वश में हैं भगवान ।
भिलाई. ब्रजमंडल भिलाई के गीता भवन परिसर में चल रही श्रीरामकथा ज्ञान यज्ञ के चौथे दिन कथावाचक सुनील महाराज ने कहा कि" भाव के वश में हैं भगवान "। उन्होंने भगवान श्रीराम की बाललीलाओं का दिव्य वर्णन करते हुए कहा कि जो परमात्मा अजन्मा है वो भक्तों की भक्ति और भाव के वशीभूत होकर मानव देह धारण करके आते हैं और हम कलयुगी प्राणियों को अपनी बाल लीलाओं के माध्यम से आनंदित करते हैं।
प्रभु श्रीराम ने ताड़का रूपी कुबुद्धी का अंत किया
महाराज दशरथ एवं माता कौशल्या प्रभु की बाल सुलभ क्रियाओं को देख हर्षित हो रहे हैं। अपने परम आराध्य श्रीराम जी के दर्शन करने के लिए भगवान शिव और काकभुसुंडी अयोध्या आते हैं एवं भगवान के दर्शन प्राप्त कर आनंद के सागर में डूब जाते हैं। गुरु विश्वामित्र श्रीराम एवं लक्ष्मण को अपने यज्ञ की रक्षा हेतु राजा दशरथ से दोनों बालकों को मांगने आते हैं। गुरु के साथ वन जाकर प्रभु श्रीराम ने ताड़का रूपी कुबुद्धी का सर्वप्रथम अंत किया उसके बाद सुबाहु एवं मारीच जैसी दुष्टात्माओं का वध किया।
निरंतर मानस पाठ से घर में सुख संपदा आती है
कथाव्यास ने आगे कहा प्रत्येक मनुष्य को अपने घर में श्री रामचरितमानस का पाठ स्वयं करना चाहिए और अपने बच्चों से भी कराना चाहिए जिससे उनमें अच्छे संस्कार और उत्तम चरित्र का निर्माण हो सके। निरंतर मानस पाठ से घर में सुख संपदा आती है और मंगल होता है ,नैतिक विचारों को बढ़ावा मिलता है।
गुरु विश्वामित्र के साथ श्रीराम एवं लक्ष्मण जनकपुर पधारते हैं। रास्ते में माता अहिल्या का उद्धार करते हैं जो अपने पति के श्राप से पाषाण बनी हुई थी। वे कृपावत्सल के चरणरज प्राप्त करके सर्वांग सुंदर स्वरूप को प्राप्त हुई। जनकपुर में आगमन के उपरांत राजा जनक से यथोचित स्वागत सत्कार प्राप्त कर भगवान श्रीराम एवं लक्ष्मण नगर भ्रमण करते हैं।
शीतला माता महिला मंडल की महिलाओं द्वारा आरती
आचार्य सौरभ जी एवं राजन जी के वैदिक मंत्रो द्वारा भगवान का पूजन करने के बाद शीतला माता महिला मंडल की महिलाओं द्वारा आरती की गई। इस अवसर पर सैकड़ों महिला-पुरुष श्रद्धालुओं ने कथा का अमृतपान किया।