गांव की जनसंख्या लगभग ढाई हजार है। इनमें से 35 फीसदी युवा है, जिन्होंने एलईडी, पेविंग टाइल्स, खाद जैसे उत्पाद तैयार करने की हामी भर दी है।
भिलाई. एक ऐसा गांव हो जहां हर किसी के पास रोजगार हो। नौकरी की तलाश गांव के युवाओं को शहर का रुख करने मजबूर न करे। महिलाएं घर की रसोई तक सीमित न रहें बल्कि आगे बढ़कर सशक्तिकरण की मिसाल पेश करे। जी हां धमधा ब्लॉक का ग्राम रवेलीडीह कुछ ऐसा ही गांव बनने की राह पर निकल पड़ा है। खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड ने एक अच्छी पहल करते हुए इसे देश का पहला बेरोजगार मुक्त गांव बनाने की ठानी है। इस कोशिश में ग्रामोद्योग के साथ-साथ एमएसएमई, बैंक और वर्धा का महात्मा गांधी ग्रामीण उद्यमिता संस्थान भी मददगार है।
यह लद्यु उद्योग खुलेंगे यहां
रवेलीडीह में एलईडी बल्ब, रेडीमेड गारमेंट, सेनेटरी पैड, सौर चरखा से खादी, मोमबत्ती, तेलघानी, मसाला उद्योग, जैविक पेस्ट कंट्रोल, टमाटर सॉस, हर्बल फ्लोर क्लिनर जैसे 50 से अधिक उत्पादों के लघु उद्योग लगाने की तैयारी है। इस गांव की जनसंख्या लगभग ढाई हजार है। इनमें से 35 फीसदी युवा है, जिन्होंने एलईडी, पेविंग टाइल्स, खाद जैसे उत्पाद तैयार करने की हामी भर दी है।
ऐसे बनेगा रवेलीडीह बेरोजगार मुक्त
ग्रामोद्योग और एमगिरी वर्धा मिलकर लद्यु उद्योग स्थापित करने में मदद करेंगे। ग्रामोद्योग यहां एक स्थायी सेंटर बनाएगा जिसमें उद्योग शुरू करने की प्रक्रिया समझाने से लेकर बैंक लोन, प्रशिक्षण और बाजार उपलब्ध कराने का काम होगा। बिजनेस मॉडल तैयार करने का काम भी ग्रामोद्योग का ही होगा। लद्यु उद्योगों में बनने वाले सामान को बेचने के लिए ग्रामोद्योग शहरों में सेंटर बनाएगी साथ ही सामान लोकल रिटेलर तक भी पहुंचेगा।
किसको होगा फायदा
गांवों में कृषि प्रधानता को महत्व दिया जाता है। जबकि युवा वर्ग नौकरी के लिए शहरों का रुख करता है। इस कोशिश के बाद गांव के गांव में ही रहकर विकास के साथी बनेंगे। वे खुद तो बढ़ेगी ही साथ में पूरे गांव को भी आगे ले जाएंगे।
इसमें खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के चेयरमैन कृष्ण कुमार रॉय, एमडी आलोक कटियार, एमएसएमई के डायरेक्टर राजीव एस नायर, महात्मा गांधी इम्पलायरमेंट प्रोग्राम के डिप्टी डायरेक्टर रवि कुमार, चंद्रकांता मंडाले शामिल हुए।
आचारी खादी व ग्रामोद्योग संचालक मंडल के सदस्य वी. विश्वनाथन ने बताया कि रवेलीडीह को बेरोजगार मुक्त गांव बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। गांव में लद्यु उद्योगों का जाल होगा। ग्रामिण अपने व्यापार क्षेत्र का चुनाव खुद करेंगे। उन्हें लोन दिलाने से लेकर प्रशिक्षण देने तक का काम ग्रामोद्योग का होगा। एमगिरी संस्था सस्ती दरों पर मशीनें देगी।