भिलाई

बीमार बीवी की देखभाल करने अस्पताल में साथ रहता था, पत्नी तो बच गई लेकिन पति…

पत्नी की देखभाल में दो- तीन दिन तक साथ में रहा। वह रात में जमीन पर सोता था। पत्नी तो ठीक हो गई, मगर पति को डेंगू ने कब जकड़ लिया उसे पता ही नहीं चला।

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Aug 28, 2018
बीमार बीवी की देखभाल करने अस्पताल में साथ रहता था, पत्नी तो बच गई लेकिन पति...

भिलाई. डेंगू का 33 वीं शिकार बना सुरेश निर्मलकर लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल सुपेला में भर्ती वायरल पीडि़त अपनी पत्नी उषा निर्मलकर की देखभाल में दो- तीन दिन तक साथ में रहा। वह रात में जमीन पर सोता था। उषा तो ठीक हो गई, मगर सुरेश को डेंगू ने कब जकड़ लिया उसे पता ही नहीं चला।

दो-तीन रात वहां जमीन पर दरी बिछाकर सोता रहा

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सुरेश के छोटे भाई गोपाल राम निर्मलकर ने बताया कि इसके पहले सुरेश बिलकुल स्वस्थ था। भाभी उषा को वायरल हो गया था। वह सुपेला शासकीय अस्पताल में भर्ती थी। जिस वार्ड में उषा थी वहां बगल के बिस्तरों पर डेंगू पीडि़त मरीज भी भर्ती थे। सुरेश दो-तीन रात वहां जमीन पर दरी बिछाकर सोता रहा। इसके बाद सुरेश भी बीमार हो गया। 22 अगस्त को बुखार आने पर वह भी पत्नी उषा की तरह वायरल बुखार समझकर मेडिकल दुकान से दवाई खरीदकर खाता रहा। दो दिन बाद जब तबीयत ज्यादा बिगड़ी तब परिजन अस्पताल लेकर गए। तब तक बहुत देर हो चुकी थी। उसका प्लेटलेट्स घटकर 1३,000 रह गया था।

नौकरी की तलाश में गांव छोड़ शहर आया था सुरेश

सुरेश मूलत: जालबांधा के पास गांव बिजेतला का रहने वाला है। गांव में खेती-किसानी कर गुजारा करता था। नौकरी की तलाश में डेढ़ साल पहले भिलाई आया। यहां वार्ड 12, कांट्रेक्टर कॉलोनी डॉ. जोशी लाइन गली स्थित अपने मकान में रहता था। चंद्रा-मौर्या टाकीज चौक के पास स्थित विशाल बिग बाजार में सेल्समैन का काम कर रहा था।

तीन मासूम बच्चों के सिर से उठा पिता का साया

सुरेश के तीन बेटे हैं। बड़ा बेटा भूपेंद्र करीब 13 साल का है। वह कक्षा सातवीं में पढ़ता है। इसके बाद मझला बेटा हिमांशु (8) और छोटा बेटा मुकेश (6) साल का है। सुरेश का शव अस्पताल से सीधे गृहग्राम बिजेतला ले गए। वहां परिजन ने अंतिम संस्कार किया।

डोर-टू-डोर सर्वे फिर सुरेश के घर कोई क्यों नहीं पहुंचा

जिला प्रशासन दावा करता है कि यहां पूरे शहर में डोर-टू-डोर सर्वे किया जा रहा है। एएनएम और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के अलावा नर्सिंग छात्राओं को भी इस काम में लगाया गया है। वे किसी भी तरह के मौसमी संक्रामक बीमारी से ही पीडि़त क्यों न हो अस्पताल पहुंचा रहे है तो सवाल यह है कि सुरेशा के घर कोई क्यों नहीं पहुंचा। वह दो दिन तक मेडिकल दुकान से दवाई खरीदकर खाता रहा।

वार्ड में चार बच्चे गंभीर

वार्ड 12 के पार्षद भोजराज सिन्हा ने बताया कि उनका वार्ड पूरा डेंगू संक्रमण हो गया है। वे रोज खदु मॉनिटरिंग कर रहे है फिर भी सुरेश के बारे में कैसे पता नहीं चला, इसका उन्हें बेहद पछतावा है। सिन्हा ने बताया कि अभी वार्ड के चार बच्चे और गंभीर है। दो अलग-अलग निजी अस्पतालों के आईसीयू में इलाज चल रहा है।

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Updated on:
30 Aug 2018 12:10 pm
Published on:
28 Aug 2018 10:50 pm
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