
IIT भिलाई में डायबिटीज के मरीजों के लिए नई खोज (Photo Patrika)
Bhilai News: डायबिटीज के मरीजों के लिए एक क्रांतिकारी तकनीक सामने आई है, जो भविष्य में उन्हें बार-बार इंसुलिन इंजेक्शन लेने के दर्द से मुक्ति दिला सकती है। आईआईटी भिलाई के वैज्ञानिकों के नेतृत्व में एक ऐसी 'स्मार्ट इंसुलिन जैल' विकसित की गई है, जो शरीर में रक्त शर्करा (ब्लड शुगर) का स्तर बढ़ने पर खुद-ब-खुद इंसुलिन रिलीज करती है। यह शोध मधुमेह के उपचार में एक बड़ा बदलाव लाने की क्षमता रखता है। सामान्य इंसुलिन थेरेपी में मरीजों को दिन में कई बार इंजेक्शन लेने पड़ते हैं, जिसकी प्रभावशीलता भी सीमित होती है। इसके विपरीत, यह स्मार्ट जैल एक 'ग्लूकोज-संवेदनशील प्रणाली' पर काम करता है। जब इसे इंजेक्शन के जरिए शरीर में पहुंचाया जाता है, तो यह इंसुलिन को एक साथ रिलीज करने के बजाय धीरे-धीरे और जरूरत के अनुसार शरीर में छोड़ता है।
इस तकनीक की सबसे बड़ी खूबी यह है कि जैसे ही रक्त में शर्करा का स्तर बढ़ता है, यह जैल तुरंत सक्रिय हो जाता है और इंसुलिन छोड़ना शुरू कर देता है। वहीं, शुगर लेवल सामान्य होने पर इसका उत्सर्जन स्वतः कम हो जाता है। यह प्रक्रिया रक्त शर्करा को लंबे समय तक स्थिर बनाए रखने में सक्षम है। चूहों पर किए गए प्रारंभिक परीक्षणों में यह जैल सात दिनों तक शुगर नियंत्रित करने में सफल रहा है।
यह शोध कार्य आईआईटी भिलाई के प्रोफेसर डॉ. सुचेतन पाल के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ है। इस परियोजना में रूंगटा इंटरनेशनल स्किल्स यूनिवर्सिटी (आरआईएसयू) के स्कूल ऑफ फार्मेसी के प्रोफेसर डॉ. संजय गुप्ता की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही। शोध दल ने पाया कि यह जैल शरीर के ऊतकों के साथ पूरी तरह अनुकूल है और लंबे समय तक अपनी प्रभावशीलता बनाए रखता है। इसमें स्वयं को पुनर्गठित करने की भी अनूठी क्षमता है।
इस शोध के परिणाम प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय जर्नल 'एसीएस अप्लाइड बायोमटेरियल्स' में प्रकाशित हुए हैं, जो वैज्ञानिक जगत में चर्चा का विषय बने हुए हैं। शोधकर्ताओं का मानना है कि यदि भविष्य के क्लिनिकल परीक्षणों में भी यह तकनीक उतनी ही प्रभावी साबित होती है, तो यह लाखों मधुमेह रोगियों के जीवन को आसान बना देगी। यह न केवल स्वास्थ्य प्रबंधन को सरल बनाएगी, बल्कि मरीजों के जीवन स्तर में भी उल्लेखनीय सुधार करेगी।
तकनीक: ग्लूकोज-संवेदनशील स्मार्ट इंसुलिन जेल।
प्रभाव: एक बार इंजेक्शन लेने पर सात दिनों तक शुगर नियंत्रण।
खासियत: जरूरत के अनुसार इंसुलिन का स्वतः उत्सर्जन।
सहयोग: आईआईटी भिलाई और आरआईएसयू के वैज्ञानिकों का साझा प्रयास
Updated on:
10 Jun 2026 01:40 pm
Published on:
10 Jun 2026 01:36 pm
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