
जुलू टॉप पर तिरंगा फहराकर अमर हुए वीर कौशल यादव (photo source- Patrika)
Veer Chakra Award: कारगिल युद्ध (1999) की वीरगाथा जब भी याद की जाएगी, भिलाई के वीर सपूत स्क्वॉड कमांडर (नायक) कौशल यादव का नाम गर्व से लिया जाएगा। देश की रक्षा करते हुए 25 जुलाई 1999 को जुलू टॉप पर तिरंगा फहराकर उन्होंने अपना सर्वोच्च बलिदान दिया था। उनकी इस अदम्य वीरता के लिए उन्हें मरणोपरांत देश के तीसरे सर्वोच्च वीरता सम्मान 'वीर चक्र' से अलंकृत किया गया।
मई 1999 में जब कारगिल युद्ध छिड़ा, तब कौशल यादव को बेहद दुर्गम और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण जुलू टॉप पर कब्जा करने की जिम्मेदारी सौंपी गई। दुश्मन ऊंची चोटियों पर मजबूत बंकर बनाकर बैठा था, जबकि भारतीय जवानों को माइनस 15 डिग्री की हाड़ कंपा देने वाली ठंड और सीधी खड़ी चढ़ाई के बीच आगे बढ़ना था। इन विपरीत परिस्थितियों के बावजूद कौशल यादव ने बिना डरे अपने दस्ते का नेतृत्व किया और दुश्मन के ठिकाने पर धावा बोल दिया।
मुठभेड़ के दौरान कौशल यादव अदम्य साहस दिखाते हुए सीधे पाकिस्तानी बंकर में घुस गए। आमने-सामने की भीषण लड़ाई में उन्होंने 5 पाकिस्तानी सैनिकों को ढेर कर दिया। इस दौरान कई गोलियां उनके सीने में लगीं, लेकिन गंभीर रूप से घायल होने के बाद भी उन्होंने मोर्चा नहीं छोड़ा। उनके इस अप्रत्याशित हमले से बौखलाए करीब 130 पाकिस्तानी सैनिकों को भारतीय जवानों ने जुलू टॉप से भागने पर मजबूर कर दिया। सीने में गोली लगने के बावजूद उन्होंने जुलू टॉप पर तिरंगा फहराया और मातृभूमि की गोद में सदा के लिए सो गए।
3 मई 1999 को चरवाहे ताशी नामग्याल ने सेना को पाकिस्तानी घुसपैठ की पहली सूचना दी। इसके बाद थल सेना ने 'ऑपरेशन विजय' और वायुसेना ने 'ऑपरेशन सफेद सागर' चलाया। 18 हज़ार फीट की ऊंचाई और माइनस 50 डिग्री तक गिरे तापमान में लड़ाई लड़ी गई। 26 जुलाई 1999 को भारत ने सभी चोटियों को मुक्त कराकर तिरंगा लहराया।
छत्तीसगढ़ खेल एवं युवा कल्याण विभाग ने शहीद कौशल की स्मृति में जूनियर खिलाड़ियों के लिए राज्य स्तरीय शहीद कौशल यादव पुरस्कार की स्थापना साल 2018-19 में की। वे भिलाई के हुडको सेक्टर के रहने वाले थे। जिस कॉलोनी में वह रहते थे, उसका नाम बदल कर शहीद कौशल यादव कर दिया गया।
Updated on:
26 Jul 2026 09:14 am
Published on:
26 Jul 2026 09:14 am
