Yes Bank Scam: लगभग 165 करोड़ के यस बैंक घोटाले की जांच अब सीबीआई करेगी। हाईकोर्ट की डबल बेंच ने 11 मार्च को संपूर्ण जांच सीबीआई को सौंपने का आदेश दे दिया है…
Yes Bank Scam: भिलाई नगर के बहुचर्चित लगभग 165 करोड़ के यस बैंक घोटाले के मामले में उच्च न्यायालय में चल रही आपराधिक रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय की डबल बेंच ने 11 मार्च को संपूर्ण जांच सीबीआई को सौंपने का आदेश दे दिया है। उच्च न्यायालय की दोहरी पीठ में मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा ने 56 पृष्ठ के आदेश को जारी कर दिया है। आदेश में राज्य सरकार द्वारा की जा रही जांच पर असंतोष सहित यस बैंक के द्वारा लीपापोती पूर्ण कार्यवाही करने और तथ्यों को छुपाने की बात का उल्लेख करते हुए न्यायालय ने यह माना कि ऐसी स्थिति में सीबीआई की जांच के अतिरिक्त कोई दूसरा रास्ता नहीं है।
उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में सारे दस्तावेज और जानकारियां दुर्ग पुलिस कप्तान को सीबीआई को सौंपने के आदेश दिए हैं, जिनमें अनिमेष सिंह की ओर से की गई प्रथम सूचना रिपोर्ट और हितेश चौबे द्वारा किए गए काउंटर प्रथम सूचना रिपोर्ट की संपूर्ण जानकारी सीबीआई को देने कहा गया है। उच्च न्यायालय के आदेश में याचिकाकर्ता प्रभुनाथ मिश्रा द्वारा प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों और सभी कार्यवाहियों की विस्तृत जानकारी दी है। संपूर्ण मामले में जिन-जिन व्यक्तियों, कार्यालयों व अधिकारियों के साथ प्रकरण के संबंध में लिखा-पढ़ी हुई थी, उसका विस्तृत वर्णन किया गया है। स्वाभिमान पार्टी द्वारा किए गए कार्यों का भी इसमें उल्लेख किया गया।
स्वाभिमान पार्टी के नेता एवं अधिवक्ता सतीश कुमार त्रिपाठी ने बताया कि उच्च न्यायालय ने इस संबंध में सीबीआई को एक अलग प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करने का आदेश दिया है। 7 अप्रैल 2026 को पुन: सुनवाई का आदेश जारी किया गया है। मामले का वह तकनीकी पहलू जिस पर मुख्य न्यायाधीश ने अपनी नाराजगी जाहिर की थी वह यह था कि यस बैंक सुपेला शाखा भिलाई द्वारा अनिमेष सिंह के नाम पर खोले गए खाते में प्रत्येक लेनदेन का नाम सहित संपूर्ण विवरण देने कहा गया था। किंतु यस बैंक द्वारा जानकारियां छुपाई गई। सरकार की जांच भी केवल पोस्टमैन की तरह लिखा पढ़ी कर चल रही थी।। इस कारण मुख्य न्यायाधीश ने अंतत: सीबीआई जांच का आदेश प्रदान किया है।
याचिकाकर्ता प्रभुनाथ मिश्रा ने इस फैसले को ऐतिहासिक फैसला बताते हुए कहा है कि जिस मामले को कभी गंभीरता से शासन द्वारा लिया नहीं गया, उस मामले में अंतत: सीबीआई की जांच का आदेश किया जाना यह सिद्ध करता है कि यह प्रकरण छत्तीसगढ़ की राजनीति में भूचाल लाने वाला प्रकरण अवश्य है। मिश्रा ने कहा कि हमारा उद्देश्य दूध का दूध और पानी का पानी करना था। ईमानदार, चरित्रवान और निष्ठावान लोग राजनीति में प्रवेश करें और अपराधियों को उनका सही स्थान मिले, यही अपेक्षा थी।
पूर्व की कांग्रेस सरकार और उसके बहुत से नेताओं ने इस पूरे प्रकरण में न सिर्फ आंख मूंद रखी थी बल्कि झूठे तथ्यों के आधार पर न्यायालय को भी गुमराह करते रहे। आज ऐसी सारी कोशिशें नाकाम हो गई। सीबीआई की जांच उच्च न्यायालय की अभिरक्षा में ही होगी। अवैध धन से नेता बने लोगों और उनके सभी सहयोगियों का नाम जनता के सामने उजागर हो यह आवश्यक है। मिश्र ने बताया कि उच्च न्यायालय में अधिवक्ता सतीश कुमार त्रिपाठी द्वारा अपराधिक रिट याचिका दाखिल की गई थी।
बादशाह प्रसाद सिंह वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में मामले के साथ संलग्न रहे। अधिवक्ता सतीश कुमार त्रिपाठी ने जितनी मेहनत और प्रयास किया है उसके लिए मिश्रा ने उन्हें धन्यवाद दिया। लंबे समय तक लगातार प्रयासों का परिणाम आज मिला। अंतत: सीबीआई जांच का आदेश दे दिया गया।