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दुर्ग के 131 फार्म हाउस के अंदर चल क्या रहा.. स्थानीय लोगों को पता ही नहीं, बड़े नेटवर्क की आशंका!

CG Opium: समोद अफीम कांड के बाद दुर्ग जिले में एक बड़े नेटवर्क की आशंका को जन्म दे दिया है। दरअसल बाहरी लोग ऊंचे किराए पर जमीन लेकर संदिग्ध खेती कर रहे हैं..

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Opium Farming in CG

बीजेपी नेता के खेत में करोड़ों रुपए की अफीम की खेती ( Photo - Patrika )

CG Opium case: बीरेंद्र शर्मा. दुर्ग जिले के ग्राम समोदा में आठ करोड़ रुपए की अवैध अफीम फसल के खुलासे ने एक बड़े नेटवर्क की आशंका को जन्म दे दिया है। यह मामला सिर्फ एक खेत या एक गांव तक सीमित नहीं, बल्कि जिलेभर में फैलते उस पैटर्न की ओर इशारा करता है, जहां बाहरी लोग ऊंचे किराए पर जमीन लेकर संदिग्ध खेती कर रहे हैं।

CG Opium Case: 10 से 15 हजार रुपए के किराए में मिल जाती है जमीन

जिले के किसान बताते हैं कि सामान्यत: एक एकड़ जमीन 10 से 15 हजार रुपए में किराए पर मिल जाती है। लेकिन पिछले कुछ समय से बाहरी राज्यों के लोग 30 से 40 हजार रुपए तक किराया देने लगे हैं। सवाल यह है कि आखिर ऐसी कौन सी फसल है, जो इतना भारी किराया और खर्च निकालकर भी मुनाफा दे रही है? स्थानीय किसान जालम पटेल कहते हैं, कि टमाटर जैसी फसल में ही एक एकड़ में एक लाख से ज्यादा खर्च आता है। ऐसे में 40 हजार किराया देकर खेती करना संभव ही नहीं है, जब तक कुछ अलग न हो।

131 फार्म हाउस: क्या चल रहा अंदर

जिले में मौजूद करीब 131 फार्म हाउस अब जांच के दायरे में हैं। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, कई जगहों पर बाहरी लोगों की ओर से ऊंचे किराए पर जमीन लेकर बंद परिसर में खेती की जा रही है, जहां स्थानीय लोगों का प्रवेश तक प्रतिबंधित रहता है। धमधा क्षेत्र के किसान दीपक राजपूत बताते हैं कि इन फार्म हाउस में गांव के लोगों को घुसने नहीं दिया जाता। इतनी गोपनीयता सामान्य खेती में नहीं होती।

अवैध खेती या संगठित रैकेट

जांच से जुड़े सूत्र मानते हैं कि यह केवल अफीम की खेती तक सीमित मामला नहीं हो सकता। महंगे किराए, सीमित पहुंच और बाहरी नेटवर्क ये सभी संकेत एक संगठित अवैध खेती रैकेट की ओर इशारा करते हैं। एक अनुमान के अनुसार, अफीम की एक एकड़ खेती से करोड़ों का मुनाफा संभव है, जो इस पूरे खेल को आर्थिक रूप से आकर्षक बनाता है।

समोदा केस: नेटवर्क की पहली कड़ी

छह मार्च को पुलिस ने 5.62 एकड़ में फैली अफीम की फसल जब्त की, जिसकी कीमत करीब 8 करोड़ रुपए आंकी गई। जांच में सामने आया कि जमीन किराए पर ली गई थी और खेती का संचालन बाहरी व्यक्ति विकास बिश्नोई कर रहा था। इस मामले में जमीन मालिक और मास्टरमाइंड गिरफ्तार हो चुके हैं, लेकिन दो प्रमुख आरोपी अब भी फरार हैं। पुलिस की राजस्थान तक की गई तलाश भी अब तक नाकाम रही है, जिससे यह संदेह और गहरा हो गया है कि नेटवर्क व्यापक और संगठित हो सकता है।

नीतिगत बहस भी तेज

इस पूरे मामले ने एक नई बहस को जन्म दिया है। प्रगतिशील किसान संगठन के संयोजक राजकुमार गुप्ता का कहना है कि यदि नियंत्रित नीति के तहत कुछ फसलों की अनुमति दी जाए, तो अवैध गतिविधियों पर रोक लग सकती है और स्थानीय किसानों को भी लाभ मिल सकता है।

कई सवाल बाकी?

  • क्या समोदा मामला एक अकेली घटना है या बड़े नेटवर्क का हिस्सा?
  • ऊंचे किराए पर जमीन लेने वालों की असली पहचान क्या है?
  • क्या अन्य फार्म हाउसों में भी इसी तरह की गतिविधियां चल रही हैं?
  • इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में प्रशासनिक जांच से सामने आ सकते हैं। फिलहाल, समोदा का खुलासा दुर्ग जिले में खेती के नाम पर चल रहे ‘काले खेल’ की एक बड़ी चेतावनी बनकर सामने आया है।