
दुर्ग अफीम कांड: कृषि विस्तार अधिकारी एकता साहू निलंबित ( Photo - Patrika)
CG Opium farming: दुर्ग जिले के ग्राम समोदा में अफीम की अवैध खेती के मामले में प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई शुरू कर दी है। मामले में कृषि विस्तार अधिकारी एकता साहू को निलंबित कर दिया गया है, जबकि हल्का पटवारी अनिता साहू और संबंधित सर्वेयर शशिकांत साहू को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। प्रशासन का मानना है कि क्षेत्र में अवैध अफीम की खेती होने के बावजूद संबंधित मैदानी अमले को इसकी जानकारी नहीं होना गंभीर लापरवाही है।
इसी आधार पर प्राथमिक स्तर पर विभागीय कार्रवाई की गई है और संबंधित अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा गया है। उधर, मामले को राज्य सरकार ने भी गंभीरता से लिया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कलेक्टर से 15 दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद जिले के प्रशासनिक महकमे में हलचल बढ़ गई है।
उप संचालक कृषि द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि यह कृत्य छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 का उल्लंघन है। छग सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1966 के तहत एकता साहू को निलंबित किया गया है। उनका मुख्यालय अनुविभागीय कृषि अधिकारी कार्यालय रहेगा।
अवैध अफीम खेती की जांच के दौरान इस मामले में एक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया। जांच में पाया गया कि जिस खसरे की जमीन को मक्का प्रदर्शन प्लॉट बताया गया था, वहां वास्तव में मक्का की खेती नहीं की जा रही थी। मक्का का प्रदर्शन किसी अन्य स्थान पर किया जा रहा था। बताया गया कि जिस स्थान पर वास्तविक मक्का प्रदर्शन किया गया था, उसके पास ही अफीम की खेती भी हो रही थी। इससे यह सवाल भी उठे कि प्रदर्शन का निरीक्षण करने वाले अधिकारी इस गंभीर स्थिति से अनभिज्ञ कैसे रहे।
गौरतलब है कि अफीम खेती के मामले में कलेक्टर द्वारा पहले ही क्षेत्र की पटवारी अनिता साहू, सर्वेयर शशिकांत साहू और कृषि विस्तार अधिकारी एकता साहू को नोटिस जारी किया गया था। जांच में कृषि विस्तार अधिकारी की गंभीर लापरवाही सामने आने के बाद अब उन्हें निलंबित कर दिया गया है।
जांच में यह सामने आया है कि जिस खसरा नंबर की जमीन को मक्का प्रदर्शन प्लॉट बताया गया, वह कथित रूप से भाजपा नेता के रिश्तेदार विमल ताम्रकार की भूमि है। जबकि वास्तविक मक्का प्रदर्शन किसी अन्य स्थान पर किया गया था। नियमानुसार प्रदर्शन प्लॉट पर सूचना बोर्ड लगाना अनिवार्य होता है, लेकिन संबंधित स्थल पर ऐसा कोई बोर्ड नहीं लगाया गया। प्रोत्साहन राशि जारी कर दी गई। जांच में यह भी पाया गया कि डिजिटल क्रॉप सर्वे और गिरदावरी के दौरान अफीम की फसल को छिपाए जाने की बात सामने आई है। इससे विभागीय कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका को लेकर भी चर्चा तेज है।
कलेक्टर अभिजीत सिंह ने कहा कि राजस्व विभाग की टीम जिले के सभी कृषि फार्मों की जांच कर रही है। आरआई, पटवारी और कोटवार मौके पर जाकर यह जानकारी जुटा रहे हैं कि खेतों में किस प्रकार की फसल लगाई गई है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
Updated on:
14 Mar 2026 01:48 pm
Published on:
14 Mar 2026 01:37 pm
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