- भीलवाड़ा के दो ठिकानों व मुम्बई सीए के घर पर कार्रवाई पूरी, पार्टी अध्यक्ष के यहां जारी - ब्लैकमनी को सफेद करने का बड़ा खेल, बोगस पार्टी के नाम पर 3 साल में करोड़ों का लेनदेन - आयकर विभाग की ताबड़तोड़ कार्रवाई
आयकर विभाग ने भीलवाड़ा में बोगस राजनीतिक पार्टी के जरिए ब्लैकमनी को सफेद करने का बड़ा नेटवर्क पकड़ा है। जांच में सामने आया है कि मुम्बई का एस सीए, दो वकील और उनके एक साथी ने मिलकर नेशनल सर्व समाज पार्टी के नाम से तीन साल पहले एक राजनीतिक दल पंजीकृत कराया और उसके बैंक खाते के जरिए 305 करोड़ रुपए का लेनदेन किया। खाते में आने वाली रकम को 10 से 20 प्रतिशत कमीशन काटकर दानदाताओं को वापस कर दिया जाता था।
कभी चुनाव नहीं लड़ी पार्टी, पदाधिकारी सिर्फ ‘डमी’
आयकर विभाग के अनुसार यह पार्टी अब तक एक भी चुनाव नहीं लड़ी। इसका अध्यक्ष विकास व्यास निवासी विजय सिंह पथिक नगर भीलवाड़ा, कोषाध्यक्ष दीपक जोशी गुर्जरों की गली, आटूण तथा सचिव कमलेश आचार्य शामिल है। वकील राहुल कोठारी निवासी विजयसिंह पथिक नगर व तीनों पदाधिकारी सिर्फ नाम के लिए बनाए गए, जबकि वास्तविक संचालन परदे के पीछे से होता था। टीम ने तीन स्थानों पर कार्रवाई को पूर्ण कर लिया है, लेकिन पार्टी अध्यक्ष व्यास के यहां कार्रवाई अभी जारी है। इनके एक साथी मुम्बई थाणे का सीए सचिन जैन के यहां की कार्रवाई में 130 से 150 करोड़ का चंदा बोगस पार्टी के खाते डालने का मामला सामने आया है। वही राहुल कोठारी ने 50 से 60 करोड़ रुपए का चंदा दिलवाया है। आयकर टीम ने सचिन जैन के आवास पर भी छापे की कार्रवाई को अंजाम दिया है।
मुंबई से ऑपरेट होता था खाता
पार्टी का बैंक खाता भीलवाड़ा में केवाईसी करवाकर खोला गया था, लेकिन इसका संचालन मुंबई से किया जाता था। जब भी बैंक खाते में लेनदेन होता, ओटीपी मुंबई में मौजूद व्यक्ति के मोबाइल पर जाता था।
गाजियाबाद और भीलवाड़ा में दबिश
आयकर विभाग की टीम सबसे पहले गाजियाबाद स्थित पंजीकृत कार्यालय पहुंची, जहां ताला मिला। इसके बाद टीम ने भीलवाड़ा में चारों के घर और ऑफिस पर छापेमारी की। कार्रवाई में जयपुर और अजमेर रेंज की टीमों ने भी हिस्सा लिया।
राजकुमार से खुला राज
14 जुलाई को आयकर विभाग ने संजय कॉलोनी, भीलवाड़ा में रहने वाले टैक्स कंसलटेंट राजकुमार के यहां छापेमारी की थी। टीम के आने की भनक लगते ही वह भाग निकला, लेकिन कुछ ही देर में पकड़ लिया गया। उसके घर से मिले दस्तावेजों में बोगस पार्टी और करोड़ों के लेनदेन का पूरा नेटवर्क सामने आया।
ब्लैकमनी को वैध बनाने का तरीका
आयकर विभाग के अधिकारियों के अनुसार तीनों पार्टी के खाते में दान के नाम पर रकम लेते थे। इसके बाद कुल राशि में से 10 से 20 प्रतिशत कमीशन काटकर बाकी रकम कैश या ट्रांसफर के माध्यम से वापस कर दी जाती थी। इस प्रक्रिया से अघोषित आय को कानूनी रूप मिल जाता था, जबकि सरकार को भारी राजस्व नुकसान होता था।