- तरणताल परिसर में आध्यात्मिक समागम: मुनि आदित्य सागर के सान्निध्य में हुई रत्नों की वृष्टि
भक्ति का ऐसा अनूठा रंग, जहां हर श्रद्धालु नृत्य के जरिए प्रभु की आराधना में लीन दिखा। अवसर था आरके कॉलोनी स्थित आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर के तत्वावधान में आयोजित 'भक्तामर महामंडल विधान' का। रविवार को तरणताल परिसर में आचार्य विशुद्ध सागर के शिष्य मुनि आदित्य सागर के सान्निध्य में जब भक्तामर के मंत्र गूंजे, तो पूरा परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर हो गया। विधान के दूसरे दिन रविवार का अवकाश होने के कारण श्रद्धालुओं का भारी सैलाब उमड़ा। भव्य मंडल के समक्ष इंद्र-इन्द्राणियों के वेश में सजे भक्तों ने मंत्रों की शक्ति और संगीत की स्वर लहरियों के बीच अर्घ्य समर्पित किए।
मुनि अप्रमितसागर ने जब भक्तामर के 48 काव्यों का भक्ति संगीत के साथ उच्चारण किया, तो माहौल भक्तिमय हो गया। पांडाल में मौजूद हर श्रद्धालु झूमने पर मजबूर था। करीब 5 घंटे तक चले इस अनुष्ठान में एक-एक कर 48 अर्घ्य अर्पित किए गए। विधान की एकाग्रता ऐसी थी कि श्रद्धालुओं का ध्यान केवल भक्ति और प्रभु के चरणों में ही लगा रहा।
विधान का आकर्षण तब और बढ़ गया जब विधान मंडल पर सौधर्म इंद्र विकास सेठी, कुबेर इंद्र संजय झांजरी सहित अन्य इंद्रों ने आहुतियां दीं। इस दौरान घन कुबेर संजय झांझरी की ओर से प्रतीकात्मक रूप से रत्नों की वृष्टि की गई, जिसने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। आयोजन में चक्रवर्ती इंद्र प्रदीप चौधरी, बाहुबली इंद्र राजेश विनायका और महायज्ञनायक इंद्र सुभाष सेठी ने भी प्रमुख भागीदारी निभाई।
मुनि आदित्य सागर ने जीवन के मर्म को समझाया। उन्होंने कहा, "पुण्य कर्मों से हमें यह मनुष्य देह, मन और वचन मिले हैं, इनका सदुपयोग करना सीखें। समय को व्यर्थ न गंवाएं। जो खर्च करना जानता है, वही कमाना भी सीख जाता है। शाम को आयोजित 'श्रुत समाधान' और मुनि की संगीतमय आरती में भी श्रद्धालु उमड़े। तीन दिवसीय भक्तामर महामंडल विधान का समापान सोमवार शाम को होगा।