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अफीमची तोते…! तारों पर उलटा लटकते, यहां वहां गिरते-पड़ते, अफीम के खेतों ने तोतों को बनाया नशेड़ी

तोते अफीम के डोडों में मौजूद नशीले रस का स्वाद लेते हैं और धीरे-धीरे इसके आदी हो जाते हैं। तोतों के झुंड दिन में कई बार खेतों पर हमला करते हैं। वे डोडों को काटते हैं और उन्हें लेकर उड़ जाते हैं।
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भीलवाड़ा

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Kamal Mishra

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अनिल सिंह चौहान

Feb 08, 2026

Opium-addicted parrots

अफीम का रस चूसता तोता (फोटो-पत्रिका)

भीलवाड़ा। अफीमची तोते तारों पर उल्टे लटकते, इधर-उधर गिरते-पड़ते रहते हैं। सुनने और पढ़ने में यह भले ही अजीब लगे, लेकिन इन दिनों राजस्थान के मेवाड़ और हाड़ौती के कुछ इलाकों में यह नजारा आम हो गया है। तोतों की यह नशे की आदत प्रदेश के कई जिलों में अफीम की खेती करने वाले किसानों के लिए गंभीर समस्या बनती जा रही है।

इन इलाकों में बड़ी संख्या में पाए जाने वाले तोते अफीम के फूलों और डोडों की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं। हालात यह हैं कि तोते लगातार खेतों में पहुंचकर डोडे खा रहे हैं और नशे की हालत में नजर आने लगे हैं। किसानों का कहना है कि फसल पकने के समय तोते झुंड के रूप में खेतों पर टूट पड़ते हैं।

20 प्रतिशत तक नुकसान कर रहे तोते

एक अनुमान के अनुसार, तोते अफीम की फसल को करीब 20 प्रतिशत तक नुकसान पहुंचा रहे हैं। कई बार डोडे अधखाए रह जाते हैं, जिससे अफीम की गुणवत्ता प्रभावित होती है। इसके चलते किसानों को लाखों रुपए का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

तोतों को भाता नशीला रस

तोते अफीम के डोडों में मौजूद नशीले रस का स्वाद लेते हैं और धीरे-धीरे इसके आदी हो जाते हैं। तोतों के झुंड दिन में कई बार खेतों पर हमला करते हैं। वे डोडों को काटते हैं और उन्हें लेकर उड़ जाते हैं। ये तोते इतने शातिर हो गए हैं कि आवाज करने पर भी नहीं डरते और चुपचाप फसल को नुकसान पहुंचाते रहते हैं।

बदल जाता है व्यवहार

अफीम के नशे में धुत्त तोतों का व्यवहार असामान्य हो जाता है। कुछ समय के लिए वे उड़ने में भी असमर्थ हो जाते हैं। नशे की हालत में ये तोते आवारा कुत्तों और अन्य शिकारी जानवरों का आसान शिकार बन रहे हैं।

पटाखे, डरावने पुतले और जाल भी फेल

तोतों से फसल बचाने के लिए किसान अपने स्तर पर कई प्रयास कर रहे हैं। पटाखे फोड़कर, ढोल बजाकर और जाल बिछाकर उन्हें भगाने की कोशिश की जाती है, लेकिन तोते बार-बार लौट आते हैं। बड़ी संख्या में किसानों ने खेतों में नायलॉन नेट लगाना शुरू किया है। एक हेक्टेयर खेत में नेट लगाने पर करीब 35 हजार रुपए तक का अतिरिक्त खर्च आ रहा है। इसके अलावा किसान चमकदार टेप और डरावने पुतलों का भी सहारा ले रहे हैं।

फैक्ट फाइल

  • पूरे अफीम बेल्ट में 2.5 लाख से अधिक तोतों की आबादी
  • अफीम की खेती: चित्तौड़गढ़, प्रतापगढ़, भीलवाड़ा, झालावाड़, कोटा, बारां, उदयपुर (सीमित क्षेत्रों में)
  • 49,140 लाइसेंस अफीम की खेती के
  • 34,776 लाइसेंस अफीम गोंद उत्पादन के
  • 14,364 लाइसेंस बिना चीरे की अफीम पोस्त डोडा उत्पादन के
  • 47 टीमें निरीक्षण और खेतों की पैमाइश के लिए तैनात

इनका कहना है-

अफीम काश्तकारों के लिए सबसे बड़ी समस्या डोडों को पक्षियों से बचाना है। पौधों पर डोडे आने के बाद सबसे ज्यादा नुकसान तोते पहुंचाते हैं। तोते डोडे खाकर नशेड़ी हो रहे हैं। इससे बचाव के लिए किसानों को उपज की रक्षा के लिए नेट का सहारा लेना पड़ता है। -बद्रीलाल तेली, प्रांत अध्यक्ष, अफीम किसान संघर्ष समिति

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