
Winds of change: Now 'drones' are spraying fertilizers and fields are flourishing with 'solar energy'.
कभी मौसम की मार तो कभी बिजली की किल्लत से जूझने वाला प्रदेश का किसान अब 'स्मार्ट' हो गया है। खेतों में अब बैलों की जगह आधुनिक मशीनों ने ले ली है और यूरिया के छिड़काव के लिए घंटों पसीना बहाने के बजाय 'ड्रोन' का इस्तेमाल हो रहा है। कृषि में आए इस क्रांतिकारी बदलाव में सरकारी योजनाओं की भूमिका संजीवनी साबित हो रही है। सरकार की ओर से कृषि यंत्रों, सोलर पंप और आधुनिक तकनीक पर दी जा रही सब्सिडी (अनुदान) ने किसानों की राह आसान कर दी है। जो तकनीक कभी आम किसान की पहुंच से दूर थी, आज सरकारी मदद से वह हर खेत तक पहुंच रही है। इस योजना के तहत शाहपुरा क्षेत्र के 300 किसानों को जोड़ा गया है। सफलता मिलने पर समूचे जिले के किसानों को जोड़ा जाएगा।
कृषि विभाग के अनुसार नैनो यूरिया और कीटनाशकों के छिड़काव के लिए ड्रोन तकनीक को बढ़ावा दिया जा रहा है। जिस काम में पहले पूरा दिन लगता था, अब वह 15-20 मिनट में हो रहा है। रसायनों के सीधे संपर्क में न आने से किसानों के स्वास्थ्य पर बुरा असर भी नहीं पड़ रहा। सरकार ड्रोन खरीद पर आरक्षित वर्ग और लघु-सीमांत किसानों को 75 प्रतिशत तक अनुदान दे रही है।
पीएम कुसुम योजना ने बंजर पड़ी जमीनों को भी आबाद कर दिया है। सरकार की ओर से सोलर पंप लगाने पर 60 प्रतिशत तक की सब्सिडी दी जा रही है। किसानों को अब दिन में सिंचाई के लिए बिजली का इंतजार नहीं करना पड़ता। डीजल पंप का खर्च खत्म होने से खेती की लागत में भारी कमी आई है।
भीलवाड़ा जैसे जिलों में जहाँ भूजल स्तर गिर रहा है, वहां सरकारी अनुदान पर आधारित 'ड्रिप इरिगेशन' (बूंद-बूंद सिंचाई) और 'मिमी स्प्रिंकलर' वरदान साबित हुए हैं। वहीं, संरक्षित खेती पॉली हाउस-ग्रीन हाउस के लिए मिल रहे 50 से 70 प्रतिशत अनुदान ने किसानों को बेमौसम सब्जी और फूलों की खेती के लिए प्रेरित किया है। इससे उनकी आय में दुगुना इजाफा हुआ है।
फसलों में सिंचाई के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की सटीक सलाह लेने लगे हैं। सरकार ने जिले के 400 किसानों को इस नवाचारी एआई-आधारित तकनीक से जोड़ने का लक्ष्य तय किया है। एआई का उपयोग ई-कॉमर्स, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, विपणन, खगोल विज्ञान, खेल, बैंक और सुरक्षा जैसे विभिन्न क्षेत्रों में किया जा रहा है। एआई और सैटेलाइट तकनीक का उपयोग करके किसानों को सटीक सिंचाई की सलाह देता है। यह एक हार्डवेयर-मुक्त, क्लाउड समाधान है।
तकनीकी नवाचार ही कृषि का भविष्य है। सरकार का उद्देश्य खेती की लागत को कम करना और उत्पादन बढ़ाना है। किसान साथी ई-मित्र या राज किसान साथी पोर्टल के जरिए पाइपलाइन, फव्वारा, सोलर पंप और कृषि यंत्रों पर सब्सिडी के लिए आवेदन कर लाभ उठा सकते हैं।
-शंकरसिंह राठौड़, उपनिदेशक, उद्यान
भीलवाड़ा फैक्ट फाइल
Published on:
08 Feb 2026 09:02 am
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