समय पर काम नहीं निपटाया तो गिरेगी गाज, नियम 16/17 के तहत होगी सख्त कार्रवाई
शिक्षा विभाग में अब लेट-लतीफी और शिक्षकों की फाइलों को अटकाकर बैठने की आदत अधिकारियों और कर्मचारियों को भारी पड़ेगी। माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अगर समय पर प्रकरण निस्तारित नहीं किए गए और इस वजह से न्यायालय में विभाग की किरकिरी हुई, तो संबंधित अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ सीधे नियम 16 और 17 के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
माध्यमिक शिक्षा निदेशक सीताराम जाट ने इस संबंध में आदेश जारी किए हैं। निदेशालय के संज्ञान में आया था कि शिक्षकों और अन्य विभागीय कार्यों से जुड़े पत्र, प्रकरण या ई-डाक संबंधित अनुभागों की ओर से तय समय पर रजिस्टर में दर्ज और प्रस्तुत नहीं किए जा रहे हैं। फाइलों के इस तरह अटके रहने से निस्तारण में अनावश्यक विलंब हो रहा है। इसका सीधा खामियाजा शिक्षकों और विभाग को भुगतना पड़ रहा है।
आदेश में सबसे गंभीर चिंता न्यायिक मामलों को लेकर जताई गई है। निदेशक ने माना है कि कई बार न्यायिक वाद और अवमानना (कंटेम्प्ट) जैसी संवेदनशील स्थिति होने के बावजूद प्रकरणों को प्रस्तुत करने या निस्तारण कराने में भारी लापरवाही और देरी देखने को मिलती है। इससे न्यायालयों के सामने विभाग को बेहद असहज स्थिति का सामना करना पड़ता है और जवाब देते नहीं बनता।
निर्देशों की अवहेलना करने वाले जिम्मेदार अधिकारी और कार्मिक के विरुद्ध राजस्थान असैनिक सेवाएं (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1958 के नियम 16 या 17 के तहत विभागीय कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। उल्लेखनीय है कि नियम 16 और 17 के तहत आरोप पत्र देकर वेतन वृद्धि रोकने, पदावनत करने या सेवा से बर्खास्त करने जैसे कठोर दंड दिए जाते हैं।
इस आदेश के बाद निदेशालय और विभाग में अटके शिक्षकों के काम जैसे- पदस्थापन, एरियर, छुट्टी या अन्य परिवेदनाएं अब समय पर पूरे होने की उम्मीद है। वहीं अब कोई भी कर्मचारी फाइल को यह कहकर नहीं टाल सकेगा कि मामला उनके पास नहीं है। रजिस्टर में समय पर दर्ज करना अनिवार्य होगा। साथ ही समय पर मामलों का निस्तारण होने से शिक्षकों को छोटे-छोटे कामों के लिए कोर्ट का दरवाजा नहीं खटखटाना पड़ेगा।
राजेन्द्र गग्गड़, डीईओ मुख्यालय भीलवाड़ा