भीलवाड़ा

बनास का सीना छलनी: कोर्ट की रोक बेअसर, भीलवाड़ा में बेलगाम बजरी माफिया; हमीरगढ़ बना नया ‘हॉटस्पॉट’

राजस्थान उच्च न्यायालय की सख्ती और बजरी खनन पर पूर्ण रोक के दावों की भीलवाड़ा में सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।

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Mar 05, 2026
Banas's chest pierced: Court's stay ineffective, khaki and mineral department 'mute spectators'

राजस्थान उच्च न्यायालय की सख्ती और बजरी खनन पर पूर्ण रोक के दावों की भीलवाड़ा में सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। जिले में बजरी माफिया इस कदर बेखौफ हैं कि बनास नदी का सीना चीरकर दिन-रात अवैध खनन को अंजाम दिया जा रहा है। सिस्टम की नाक के नीचे से हर दिन सैकड़ों ट्रैक्टर-ट्रॉली और डंपर फर्राटे भर रहे हैं, लेकिन पुलिस और खनिज विभाग की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है।

हमीरगढ़ बना अवैध खनन का केंद्र

अवैध बजरी खनन के मामले में हमीरगढ़ थाना क्षेत्र अब माफियाओं का नया हॉटस्पॉट बन चुका है। क्षेत्र के भैसा कुंडल, कान्या खेड़ी, खेड़ा बरडोद, सायला, स्वरूपगंज (बीलिया), खेत हजारिया, खेड़ा नाका और जवासिया जैसे गांवों में माफियाओं का राज है। माफियाओं ने न केवल नदी में बड़े-बड़े ढेर लगा दिए हैं, बल्कि सरकारी चारागाह जमीनों पर भी कब्जा कर उन्हें अवैध स्टॉक का अड्डा बना लिया है।

बॉर्डर पार का खेल: चित्तौड़गढ़ के रास्ते मध्य प्रदेश तक सप्लाई

खनन का यह काला खेल बेहद संगठित तरीके से चल रहा है। जवासिया से मात्र 2-3 किमी दूर चित्तौड़गढ़ की सीमा में बजरी खाली की जाती है। इस कार्य में 200 से अधिक ट्रैक्टर-ट्रॉली दिन-रात जुटे हुए हैं। चित्तौड़ सीमा से रोजाना करीब 100 डंपर 'टोकन सिस्टम' के जरिए निम्बाहेड़ा, प्रतापगढ़ और पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश तक भेजे जा रहे हैं।

बड़ा सवाल: जब लीज शून्य, तो डंपर किसके?

प्रशासनिक दावों की पोल इस एक तथ्य से खुल जाती है कि वर्तमान में भीलवाड़ा जिले में बनास नदी के भीतर एक भी बजरी लीज वैध रूप से संचालित नहीं है। पूरे भीलवाड़ा जिले में केवल 4 लीज चल रही हैं, और वे भी बनास नदी क्षेत्र से बाहर हैं। ऐसे में सड़कों पर दौड़ते ओवरलोड डंपर सीधे तौर पर प्रशासनिक मिलीभगत की पुष्टि करते हैं।

डेटा की नजर में अवैध कारोबार की हकीकत

  • विवरण वर्तमान स्थिति
  • बनास नदी में वैध लीज 00 (शून्य)
  • सक्रिय ट्रैक्टर-ट्रॉली 200 से अधिक
  • दैनिक डंपर सप्लाई 100 डंपर
  • प्रमुख गंतव्य निम्बाहेड़ा, प्रतापगढ़, मध्य प्रदेश
  • प्रभावित क्षेत्र हमीरगढ़ के 8 से अधिक गांव

पत्रिका व्यू

उच्च न्यायालय के आदेशों की अवमानना और सरकारी संपदा की लूट बिना 'ऊपर' के संरक्षण के संभव नहीं है। यदि समय रहते जिम्मेदार विभागों ने कुंभकर्णी नींद नहीं त्यागी, तो बनास का अस्तित्व और भूजल स्तर पूरी तरह तबाह हो जाएगा।

Updated on:
05 Mar 2026 10:43 am
Published on:
05 Mar 2026 09:16 am
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