
भीलवाड़ा चुनाव आयोग ने 80 साल से अधिक आयु के लोगों को होम वोटिंग का अधिकार दिया, लेकिन इसके दायरे में महज 2130 वोटर आए। बीएलओ के सर्वे में वे लोग नहीं आए, जो 25 नवंबर को बमुश्किल वोट देने बूथ तक पहुंचे। कुछ लोगों को होम वोटिंग सुविधा की जानकारी ही नहीं मिली। ऐसा प्रचार-प्रसार की कमी से हुआ। सर्वे के दायरे में भी ऐसे लोग नहीं आ पाए।
बापूनगर के 85 वर्षीय मतदाता व्हीलचेयर पर आए। बोले-होम वोटिंग का पता नहीं था। इसी तरह गंगापुर में विद्यालय में 85 साल की शांतिदेवी को परिजन गाड़ी से लाए। चलने-फिरने की हिम्मत नहीं थी। मुजरास में एक महिला वोटर को मोटरसाइकिल पर लाए। यानी ऐसे केस हर बूथ पर 8 से 10 पहुंचे। इस तरह 1899 बूथों पर करीब 26,606 बुजुर्ग मतदाता पहुंचे, जो चलने-फिरने पर सक्षम नहीं थे। इन सभी को होम वोटिंग के दायरे में लिया जाना चाहिए था।
इधर, शासन को होम वोटिंग के दौरान कई समस्याएं आईं। प्रशासनिक अधिकारियों का तर्क है कि जिन लोगों ने सर्वे में घर वोट डालने की इच्छा जाहिर की और होम वोटिंग के लिए फार्म भरा, उनके वोट घर पर ही बैलेट पेपर से डलवाए गए हैं।
26,606 मतदाता पहुंचे बूथ पर
जिले में होम वोटिंग सुुविधा होने के बाद भी जिले में करीब 26,606 मतदाता किसी न किसी के सहारे से बूथ पहुंचे। इनमें आसीन्द में 4,197, मांडल 4,482, सहाड़ा 4,825, भीलवाड़ा 1,541, शाहपुरा 3,295, जहाजपुर में 4,107 तथा मांडलगढ़ में 4,159 मतदाता शामिल है।