सुहागिन महिलाओं ने रखा व्रत
Bhilwara news : नए साल की पहली संकष्टी चतुर्थी यानी तिलकुटा चौथ माघ कृष्ण चतुर्थी पर शुक्रवार को मनाई जा रही है। सुहागिन महिलाएं व्रत रखकर दिन में गणेशजी व चौथ माता की पूजा कर रही है। चौथ माता को तिल के व्यंजनों का भोग लगाया जाएगा। रात 9.19 मिनट पर चंद्रोदय के बाद पूजन कर व्रत खोला जाएगा। इसे संकट हरण चतुर्थी और तिलकुटा चौथ भी कहा जाता है।
संकट चौथ व्रत भगवान गणेश की कृपा पाने और संकटों को दूर करने का एक पवित्र और शुभ अवसर है। इस दिन विधि-विधान से पूजा करने से सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। हिंदू धर्म में संकट चतुर्थी का विशेष महत्व है। इस दिन माताएं अपनी संतान की सुख-समृद्धि के लिए व्रत करती हैं। यह व्रत गणेश भगवान को समर्पित है। यही कारण है कि इसे अत्यंत पवित्र और शुभ माना जाता है। माघ मास की चतुर्थी तिथि शुक्रवार सुबह 4 बजकर 7 मिनट पर शुरू होगी। जो अगले दिन शनिवार को सुबह 5 बजकर 30 मिनट पर समाप्त होगा। उदयात तिथि के अनुसार संकट चतुर्थी का व्रत शुक्रवार को रखा जाएगा।
ऐसे करें संकट पूजा
भगवान गणेश को दूर्वा, तिल और गुड़ अर्पित करें। व्रत के दौरान तिल का विशेष महत्व है। इसे प्रसाद में जरूर शामिल करें। रात में चंद्रमा को अर्घ्य देकर पूजा को पूर्ण करें। गणेश चालीसा और संकट मोचन स्तोत्र का पाठ करें।
माताएं संतान के सुख के लिए रखती है संकट व्रत
पंडित अशोक व्यास ने बताया कि तिलकुटा चौथ के दिन चंद्र दर्शन और पूजा का विशेष महत्व है। महिलाएं रात में चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत पूर्ण करती हैं। संकट चौथ का व्रत भगवान गणेश की कृपा पाने के लिए किया जाता है। यह व्रत सभी कष्टों को दूर करता है और परिवार में सुख-शांति और समृद्धि लाता है। भगवान गणेश को तिल के लड्डू, गुड़, मूंगफली और गन्ने का भोग लगाया जाता है।