चार वर्षों से नहीं हुई अध्यापकों की पदोन्नतियां, शिक्षण कार्य पड़ा सुस्त
Bhilwara news : शिक्षकों की कमी ने पढ़ाई की चाल धीमी कर दी। राज्य के सरकारी विद्यालयों में एक लाख से ज्यादा शिक्षकों के पद खाली हैं। अर्द्धवार्षिक परीक्षाएं नजदीक है लेकिन शिक्षकों की कमी से पढ़ाई बाधित हो रही है। विद्यार्थियों को ना विषय की पूरी जानकारी मिल रही है और ना समय पर पाठ्यक्रम पूरा हो पा रहा है। सभी संवर्ग के शिक्षकों के रिक्त पदों के कारण शिक्षण व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
शिक्षा विभाग में व्याख्याता के लगभग 17 हजार पद खाली हैं। हाल में राज्य लोक सेवा आयोग ने व्याख्याता के 2202 पदों पर भर्ती का विज्ञापन जारी किया है, जो 11 वर्ष की भर्तियों में सबसे कम है। राज्य सरकार चार वर्ष की सभी संवर्ग के शिक्षकों की बकाया पदोन्नति जल्द करें तो शिक्षकों की कमी पूरी हो सकती है। आने वाली थर्ड ग्रेड शिक्षक भर्ती में भी पदों की संया बढ़ सकती है।
स्कूल क्रमोन्नत किए, शिक्षक नहीं
सरकार ने जनप्रतिनिधियों की मांग पर जगह-जगह स्कूल क्रमोन्नत कर दिए लेकिन शिक्षक लगाना भूल गई। अधिकतर स्कूलों में व्याख्याताओं की कमी से विभिन्न विषयों में छात्रों को पर्याप्त मार्गदर्शन नहीं मिल पा रहा है। विज्ञान, गणित और अंग्रेजी जैसे महत्वपूर्ण विषयों में छात्र को पूरा ज्ञान नहीं मिल रहा है।
शाला दर्पण पोर्टल के अनुसार रिक्त पदों की स्थिति
पद स्वीकृत रिक्त पद
अध्यापन कार्य तक प्रभावित
रिक्त पदों के कारण स्कूलों में अध्यापन कार्य प्रभावित हो रहा है। अर्द्धवार्षिक परीक्षाएं नजदीक है लेकिन पाठ्यक्रम भी पूरा नहीं हो रहा है। विद्यार्थियों का भविष्य भी प्रभावित होता है। सरकार को नई भर्ती और बकाया पदोन्नति करनी चाहिए।
नीरज शर्मा, प्रदेशाध्यक्ष, शिक्षक संघ (प्रगतिशील)