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अरावली पर सुप्रीम कोर्ट का ‘सुप्रीम’ फैसला: 10 मार्च तक जवाब की डेडलाइन, परिभाषा तय होने तक खनन पर ब्रेक

भीलवाड़ा. राजस्थान की जीवनरेखा और उत्तर भारत के सुरक्षा कवच अरावली पर्वतमाला के अस्तित्व को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अरावली की परिभाषा और उसकी पहचान से जुड़े सुओ मोटो (स्वत: संज्ञान) मामले में सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने स्पष्ट कर दिया कि अब अरावली के संरक्षण में किसी भी तरह की […]

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Supreme Court's 'supreme' decision on Aravalli: Today is the deadline for response, mining halted until definition is finalised

Supreme Court's 'supreme' decision on Aravalli: Today is the deadline for response, mining halted until definition is finalised

भीलवाड़ा. राजस्थान की जीवनरेखा और उत्तर भारत के सुरक्षा कवच अरावली पर्वतमाला के अस्तित्व को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अरावली की परिभाषा और उसकी पहचान से जुड़े सुओ मोटो (स्वत: संज्ञान) मामले में सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने स्पष्ट कर दिया कि अब अरावली के संरक्षण में किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं होगी। अदालत ने अरावली क्षेत्र को परिभाषित करने और इसके विस्तार, स्थलाकृति तथा वन क्षेत्र की स्पष्ट पहचान के लिए केंद्र सरकार से राय मांगी है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जब तक विशेषज्ञों की समिति गठित नहीं हो जाती, तब तक अरावली क्षेत्र में खनन गतिविधियों पर यथास्थिति बनी रहेगी।

विशेषज्ञ तय करेंगे- क्या है अरावली

जस्टिस की पीठ ने केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को निर्देश दिए कि अरावली क्षेत्र की परिभाषा पर अपनी राय पेश करे। इसमें क्षेत्र का विस्तार, जमीन की बनावट, वन आवरण और उन क्षेत्रों का भी विवरण देना होगा जहाँ लंबे समय से बस्तियां बसी हुई हैं। मंत्रालय को विशेषज्ञों के नामों का एक पैनल भी सुझाना होगा जो इस पर अंतिम रिपोर्ट तैयार करेंगे। कोर्ट ने सभी पक्षों को सख्त हिदायत दी है कि वे 10 मार्च 2026 तक अपने लिखित नोट जमा करा दें। अदालत ने दो टूक शब्दों में कहा कि इसके बाद कोई अतिरिक्त समय नहीं दिया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई 12 मार्च को तय की है। भीलवाड़ा जिले को अरावली क्षेत्र माना जा रहा है। लेकिन खनन व्यवसाइयों का कहना है कि भीलवाड़ा जिले के कुछ क्षेत्र अरावली में आते है। जबकि बिजौलिया उपखंड क्षेत्र तो अरावली से बाहर है। वरिष्ठ अधिवक्ता के. परमेश्वर (न्याय मित्र) ने एक विस्तृत नोट पेश किया है। इसमें अरावली के संकट और मुख्य मुद्दों को रेखांकित किया है। नई समिति के गठन तक खनन पर लगी रोक यथास्थिति के आदेश जारी रहेंगे। इसका सीधा असर राजस्थान के खनन क्षेत्रों पर पड़ेगा।

भीलवाड़ा जिले में फैला अरावली खनन क्षेत्र

जिले की चार प्रमुख तहसीलों में खनन का जाल फैला है। जहाजपुर क्षेत्र के धांधोला, पचानपुरा, घाटारानी, घेरूटा, आमल्दा, चैनपुरा, चंवलेश्वर और अभयपुरा। कोटड़ी व बनेड़ा क्षेत्र के ककरोलिया घाटी, इटावा, कंकोलिया, लापिया, मानपुरा, रणिकपुरा, जालिया और सुल्तानगढ़। मांडल व बदनोर क्षेत्र में कारोई के गुरला, मोडा मगरा, जगधारी, उम्मेदपुरा, भरक, सुरगटीस करथा, बटेरी और शीतला का चौड़ा तथा भीलवाड़ा तहसील क्षेत्र में सेथूरिया क्षेत्र शामिल है जहां पहाड़ियों पर धड़ल्ले से मशीनें चल रही हैं।