- नाट्य महोत्सव का तीसरा दिन: रंग वार्ता में लोक और आधुनिक नाटकों के अंतर्संबंधों पर मंथन
भीलवाड़ा शहर के सांस्कृतिक क्षितिज पर इन दिनों लोक और आधुनिक कलाओं का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। रसधारा सांस्कृतिक संस्थान की ओर से आयोजित चार दिवसीय नाट्य महोत्सव के तीसरे दिन रविवार को नगर निगम सभागार में मानवीय संवेदनाओं और लोक मान्यताओं के विविध रंग मंच पर जीवंत हो उठे। जहां शाम को रवींद्रनाथ टैगोर और डॉ. धर्मवीर भारती की अमर रचनाओं ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया, वहीं सुबह 'रंगवार्ता' में थियेटर की बारीकियों पर गहन मंथन हुआ। कार्यक्रम का समापन सोमवार को होगा।
शाम 5 बजे रसधारा सभागार में कम्युनिटी थियेटर मेंं टोंक की ओर से रवींद्रनाथ टैगोर लिखित नाटक 'डाकघर' का भावपूर्ण मंचन किया गया। चितरंजन नामा के निर्देशन में मंचित इस नाटक ने दर्शकों की आंखों को नम कर दिया। नाटक का केंद्र बिंदु 'अमल' नामक बालक है, जो गंभीर बीमारी के कारण घर की चारदीवारी में कैद है। यह कैद सिर्फ शारीरिक नहीं, बल्कि मानवीय बंधनों का प्रतीक बनकर उभरी। खिड़की से बाहर की दुनिया को निहारते अमल की इच्छाएं और राहगीरों से उसका संवाद जीवन की सच्ची स्पंदना को महसूस करा गया। मंच पर आशीष चावला, मणिकांत, वैद्य रामरतन और शादाब सिद्दीकी सहित अन्य कलाकारों ने अपने जीवंत अभिनय से समां बांध दिया।
रात 7 बजे टाउन हॉल में थर्ड बेल, जोधपुर की ओर से डॉ. धर्मवीर भारती लिखित नाटक 'नदी प्यासी थी' का मंचन हुआ। उम्मेद सिंह भाटी के निर्देशन में कलाकारों ने अंधविश्वास, लोक मान्यताओं और आधुनिक अवसाद के त्रिकोण को बखूबी दर्शाया। नाटक की कहानी एक ऐसे कस्बे की है जहां नदी को शांत करने के लिए 'नरबलि' की प्रथा है। मुख्य पात्र राजेश, जो प्रेम की विफलता के कारण आत्महत्या की कगार पर है, उसके मानसिक संताप और नदी की 'रक्तपिपासा' के बीच का संघर्ष दर्शकों को अंत तक बांधे रहा। मंच पर अजय करण जोशी, नेहा रांकावत और नवीन रतावा के अभिनय को खूब सराहा गया।
इससे पूर्व सुबह 10 बजे आयोजित 'रंगवार्ता' में 'सईयां भये कोतवाल' के निर्देशक निरंजन कुमार से संवाद किया गया। सत्र में अर्जुन देव चारण, स्वाति व्यास और राघवेंद्र रावत सहित विद्वानों ने लोक नाट्य और आधुनिक नाटकों के बुनियादी अंतर पर प्रकाश डाला। वक्ताओं ने कहा कि लोक नाट्य जहाँ हमारी जड़ों से जुड़े हैं, वहीं आधुनिक नाटक समसामयिक विसंगतियों को स्वर देते हैं।