भीलवाड़ा

काला सोने के पट्टे पर चली कटौती की आरी

भीलवाड़ा अफीम संभाग के लिए अच्छी खबर ये है कि इस बार तेरह गांव भी काले सोने की खेती से जुड़ गए है। इससे इस बार जिले में अफीम उत्पादक गांवों की संख्या २५८ से बढ़ कर २७१ हो गई है। जबकि एक दशक में पहली बाद संभाग में १५० लम्बरदार बदले गए है। दूसरी तरफ मोहना गांव में अफीम के पट्टे मंजूर होने के बावजूद यहां कोई खेती को तैयार ही नहीं हो सका।
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Black gold lease saw cuts
Black gold lease saw cuts

काला सोने के पट्टे पर चली कटौती की आरी

भीलवाड़ा। भीलवाड़ा अफीम संभाग के लिए अच्छी खबर ये है कि इस बार तेरह गांव भी काले सोने की खेती से जुड़ गए है। इससे इस बार जिले में अफीम उत्पादक गांवों की संख्या २५८ से बढ़ कर २७१ हो गई है। जबकि एक दशक में पहली बाद संभाग में १५० लम्बरदार बदले गए है। दूसरी तरफ मोहना गांव में अफीम के पट्टे मंजूर होने के बावजूद यहां कोई खेती को तैयार ही नहीं हो सका।

अफीम नीति में आंशिक बदलाव के बाद भीलवाड़ा अफीम संभाग में पात्र किसानों को अफीम का पट्टा वितरण करने का कार्य पूर्ण कर लिया है। जिला अफीम विभाग भीलवाड़ा के अधीन हुए पट्टा वितरण के दौरान गत पांच साल से अफीम के पट्टे को तरस रहे कई किसानों की आस भी पूरी हुई है। हालांकि फसल वर्ष २०१९-२० के लिए किसानों के बुवाई क्षेत्र में कटौती हुई है।

केन्द्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो अभी तक प्रत्येक किसान को दस आरी का पट्टा देता आया है, लेकिन इस बार अफीम नीति में हुए बदलाव से गत वर्ष की औसत व गाढ़ता के आधार पर पांच से सात आरी के बीच में अफीम के पट्टे ही दिए गए है। इसी कारण आगामी फसल वर्ष के लिए बुवाई का क्षेत्र भी गत वर्ष के मुकाबले कम हुआ है।

मोहना में कोई तैयार नहीं
फसल वर्ष २०१९-२० की अफीम नीति में हुए आंशिक बदलाव से भीलवाड़ा संभाग में तेरह नए गांव अफीम की खेती से जुड गए है। इनमें बिजौलियां के देवनिवास, कोटड़ी का रामनगर व रावतभाटा का झरझरी गांव भी शामिल है। इनमें छह गांव तो एेसे है, जहां किसानों की संख्या मात्र एक एक है। एेसे में वो ही किसान व लम्बरदार है। जबकि मोहना गांव में तो अफीम का पट्टा पक्का होने के बावजूद यहां खेती को लेकर कोई तैयार नहीं है।

किसान बढ़े, उपज क्षेत्र घटा
जिला अफीम अधिकारी एस के सिंह ने बताया कि भीलवाड़ा अफीम संभाग में भीलवाड़ा जिले की बिजौलियां, मांडलगढ़, कोटड़ी व जहाजपुर तहसील तथा चित्तौडग़ढ़ जिले की रावतभाटा व बेगूं तहसील के २५८ गांव गत वर्ष शामिल थे, इस वर्ष अफीम नीति में हुए बदलाव से गांवों की संख्या बढ़कर २७१ हो गई है। इसी प्रकार काश्तकारों की संख्या ५२४६ से ५३७१ हो गई। दूसरी तरफ पट्टे देने की नीति में हुए बदलाव से बुवाई क्षेत्र ५२४.०७ से घटकर ३६९.९५ हैक्टेयर हो गया है। जो कि गत फसल वर्ष के मुकाबले कम है।

Published on:
30 Oct 2019 06:08 am