आगामी केंद्रीय बजट को लेकर विशेषज्ञों ने सरकार के सामने मांगों का पिटारा खोल दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए जहां सूक्ष्म व लघु उद्योगों को भुगतान नियमों में राहत की जरूरत है, वहीं शेयर बाजार में निवेश करने वाले मध्यम वर्ग को टैक्स रिबेट के दायरे में […]
आगामी केंद्रीय बजट को लेकर विशेषज्ञों ने सरकार के सामने मांगों का पिटारा खोल दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए जहां सूक्ष्म व लघु उद्योगों को भुगतान नियमों में राहत की जरूरत है, वहीं शेयर बाजार में निवेश करने वाले मध्यम वर्ग को टैक्स रिबेट के दायरे में लाना समय की मांग है। इसे लेकर राजस्थान पत्रिका की ओर से चार्टर्ड अकाउंटेंट के साथ टॉक शो किया। इसमें कई महत्वपूर्ण सुझाव उभरकर सामने आए हैं।
सीए वर्ग का कहना है कि पिछले 4-5 वर्षों में मध्यम व निम्न आय वर्ग का रुझान शेयर मार्केट और म्यूचुअल फंड की तरफ बढ़ा है। वर्तमान में धारा 87ए के तहत मिलने वाली रिबेट का लाभ शेयरों की खरीद-फरोख्त से अर्जित आय पर नहीं मिलता। इसके चलते 12 लाख से कम आय होने पर भी निवेशकों को टैक्स भरना पड़ता है। बजट में इस विसंगति को दूर कर छोटे करदाताओं और सेवानिवृत्त व्यक्तियों को राहत देने की मांग की गई है।
धारा 43बी(एच) को लेकर विशेषज्ञों ने चिंता जताई है। वित्त अधिनियम 2023 की ओर से जोड़ा गया यह क्लॉज एमएसइ को समय पर भुगतान के लिए लाया गया था, लेकिन अब बड़ी कंपनियां कर-अस्वीकृति के डर से छोटे उद्योगों से खरीद से बच रही हैं। मांग की गई है कि इस क्लॉज को वापस लिया जाए या भुगतान की छूट 'रिटर्न की नियत तिथि' तक प्रदान की जाए।
डाटा में स्पेलिंग या जन्मतिथि के मामूली अंतर के कारण बड़ी संख्या में पैन निष्क्रिय हो गए हैं। इसे सुधारने के लिए कोई मानवीय मंच नहीं होने से बैंक और निवेश के काम रुक रहे हैं। विशेषज्ञों ने इसके लिए सरल वैकल्पिक समाधान की मांग की है।
तेजी से बढ़ती गिग इकोनॉमी के लिए स्पष्ट टैक्स फ्रेमवर्क और फ्रीलांसरों के लिए सरल नियम बनाने का सुझाव दिया गया है। साथ ही, टैक्स चोरी उजागर करने वाले व्हिसलब्लोअर्स के लिए कानूनी संरक्षण और इनाम की नीति बनाने पर जोर दिया गया है, ताकि राजस्व की रक्षा हो सके। डिजिटल दौर में 4-5 साल पुराने मामलों का असेसमेंट करना व्यावहारिक नहीं है। असेसमेंट की समय-सीमा कम होनी चाहिए ताकि करदाता को पुराने रिकॉर्ड जुटाने की परेशानी न हो और प्रक्रिया पारदर्शी बने।
पत्रिका के टॉक शो में आईसीएआई भीलवाड़ा के पूर्व पूर्व अध्यक्ष सोनेश काबरा, कर विशेषज्ञ हरीश सुवालका, डॉली अग्रवाल, चिराग सेठी, शुभम अग्रवाल, वरुण रामनानी, मनन विजयवर्गीय, सीताराम गाडरी, खुशी जैन तथा कुंदन वैष्णव ने हिस्सा लिया।