
भीलवाड़ा जिले के मांडल तहसील के सुरास ग्राम पंचायत में चरागाह जमीन में खनन के लिए जिंदल सॉ लिमिटेड को आवंटित जमीन से जुड़े राजस्व नक्शे में दो बार दर्शाया गया है। जिंदल को जमीन आराजी नंबर 2096/1 में से 38 हैक्टेयर आवंटित की थी, लेकिन ऑनलाइन व ऑफलाइन नक्शे में आराजी नंबर 2096 को दो जगह दर्शाया है।
इसे लेकर मामला उलझ गया है। हालांकि जिला कलक्टर की ओर से गठित राजस्व टीम चरागाह से जुड़ी सभी जमीन की जांच कर रही है। रिपोर्ट एक-दो दिन में आएगी। उधर, अवैध खनन के खिलाफ कार्रवाई करने में प्रदेश में अव्वल रहे खनिज अभियंता को एपीओ कर दिया है।
जिंदल सॉ को खनन पट्टा संख्या 631/05 ग्राम समोड़ी, दरीबा, पांसल, मालोला तहसील भीलवाडा व सुरास की कुल चरागाह भूमि 334 हैक्टेयर जारी की थी। इसमें से सुरास की चरागाह आराजी नं. 2096 क्षेत्र 43 हैक्टेयर में से 38 हैक्टेयर जमीन दी थी। आराजी नंबर 2096 बाद में 2096/1 हो गई थी। शेष 4.5हैक्टेयर जमीन आराजी नंबर 2096 में दर्शाई गई। अधिकारियों का मानना है कि ऑफलाइन नक्शे में आराजी नबंर 2096/1 एक जगह जबकि वर्ष-2020 में ऑनलाइन करने के दौरान राजस्व कर्मचारियों ने आराजी नंबर 2096 को दो जगह दर्शा दिया। अब जांच की जा रही है कि कौनसी चरागाह जमीन जिंदल की और कौनसी गांव वालों के लिए है। उधर, फायरिंग में जख्मी राजू दरोगा के वकील का कहना है कि जान बूझकर दो जगह दर्शाया गया ताकि जिंदल को फायदा मिल सके। विवादित जगह को जिंदल अपने खनन पट्टे में मिलाना चाहती है। जबकि यह चरागाह है। यहां अवैध रूप से खनन हो रहा। जिंदल ने आराजी नंबर 2096 को शुद्दिकरण को लेकर उपखण्ड न्यायालय मांडल में अपील कर रखी है। उपखंड अधिकारी का कहना है कि कलक्टर के निर्देश पर जमीन की जांच कर रहे है। रिपोर्ट बुधवार तक आएगी।
राजनीति के भेंट चढें खनिज अभियंता
अवैध खनन के मामले में प्रदेश में सबसे ज्यादा कार्रवाई करने वाले भीलवाड़ा खनिज अभियंता जिनेश हुमड राजनीति की भेंट चढ़ गए। सरकार ने उनको एपीओ कर दिया। प्रदेश में भाजपा सरकार के गठन के बाद अवैध खनन के खिलाफ प्रदेशव्यापी अभियान चलाया जा रहा है। इसमें भीलवाड़ा अवैध खनन के अभियान में राज्य में अव्वल है। मामले में राजनीति के चलते हुमड़ को एपीओ किया।