लंबे समय से जल संकट से जूझती रही वस्त्रनगरी के सूखे कंठों को तर करने के लिए पांच सालों से जिस चम्बल जल पेयजल परियोजना के पूरा होने का इन्तजार किया जा रहा था, वह आज से पूरी हो जाएगी।
लंबे समय से जल संकट से जूझती रही वस्त्रनगरी के सूखे कंठों को तर करने के लिए पांच सालों से जिस चम्बल जल पेयजल परियोजना के पूरा होने का इन्तजार किया जा रहा था, वह आज से पूरी हो जाएगी। चंबल के पानी से रविवार से शहर की प्यास बुझना शुरू हो जाएगी। इसी के साथ जलसंकट से जूझते लोगों को राहत मिलेगी।
चंबल का पानी आने के साथ ही शहर में पिछले 11 वर्ष से जलापूर्ति का मुख्य आधार रहे ककरोलिया घाटी पेयजल परियोजना से पानी मिलना बंद हो जाएगा। जलदाय मंत्री किरण माहेश्वरी और जिला प्रभारी मंत्री अनिता भदेल रविवार अपराह्न साढ़े तीन बजे विद्या निकेतन के पीछे स्थित पम्प हाउस से बटन दबाकर 142 किलोमीटर दूर से आने वाले चम्बल के पानी को शहर की जलापूर्ति में सम्मिलित करके शुभारम्भ करेंगी।
विभाग के अधीक्षण अभियंता आरके ओझा के अनुसार पुरानी पाइप लाइनों में फिलहाल चम्बल का पानी दौड़ाया जाएगा। चम्बल से 3 करोड़ 50 लाख से 4 करोड़ लीटर पानी रोजाना मिल सकेगा। चम्बल से आपूर्ति शुरू होने से ग्यारह सालों से प्यास बुझा रहा ककरोलिया घाटी का पानी अब इतिहास हो जाएगा। यहां से रविवार से जलापूर्ति बंद कर दी जाएगी। इससे लोगों को खारा पानी पीने से मुक्ति मिलेगी।
शहर की प्यास बुझाने में मेजा बांध के बाद ककरोलिया दूसरा विकल्प बनकर उभरा था। शहर के आरसी व्सास कॉलोनी, आरके कॉलोनी, सुभाषनगर, शास्त्रीनगर सहित पुराने शहर के अधिकतर क्षेत्रों में ककरोलिया घाटी के पानी की आपूर्ति होती आई थी। हालांकि ककरोलिया घाटी से शहर में जलापूर्ति बंद होगी, लेकिन सुवाणा तक रास्ते में आने वाले गांवों को यथावत रूप से पेयजल मिलता रहेगा। वर्तमान में मेजा बांध से 130 लाख तथा ककरोलिया घाटी से 140 लाख लीटर पानी रोजाना रूप सप्लाई किया जा रहा है। इस हिसाब से दोनों जलस्त्रोतों से 2 करोड़ 70 लाख लीटर पानी मिल रहा था। अब अकेले चम्बल से 400 करोड़ लीटर पानी मिलेगा।
डेढ़ दशक बाद फिर पांतरे मिलेगा पानी
चम्बल आने के साथ ही अब लोगों डेढ़ दशक बाद सोमवार से पांतरे पानी मिलना शुरू हो जाएगा। शहर में वर्ष 2001 में अंतिम बार पांतरे जलापूर्ति हुई थी। इसके बाद से कभी 72 तो कभी 96 घंटे के अन्तराल में जलापूर्ति होती रही। जल संकट गहराने पर गर्मियों में 120 घंटे के अन्तराल में भी पानी मिला था। वर्तमान में 72 घंटे के अन्तराल में जलापूर्ति हो रही है।
इस तरह बुझाएगा चम्बल हमारी प्यास
भैसरोडग़ढ़ से चम्बल का पानी आरोली पहुंचेगी। यहां आरोली में पानी फिल्टर होगा। वर्ष-2045 के हिसाब से प्लांट का डिजाइन किया हुआ है। यहां एक बार में 24 करोड़ लीटर पानी फिल्टर हो सकता है जबकि वर्तमान में भीलवाड़ा को 5 करोड़ 13 लाख लीटर पानी की मांग है। यहां पानी फिल्टर होने के बाद पाइप लाइनों से कोटा रोड स्थित पम्प हाउस पहुंचेगा। यहां से पानी शहर को सप्लाई हो जाएगा।
22 टंकियों में डलेगा पानी
शहर में जलदाय विभाग की 22 पेयजल टंकियों में फिलहाल चम्बल का पानी डाला जाएगा। चम्बल परियोजना में 24 और नई टंकियां बन रही है। इनमें से 7 टंकियां बन चुकी है। करीब एक सप्ताह बाद परियोजना अधिकारी इसे विभाग को सौपने की स्थिति में होंगे। इस हिसाब से सवा करोड़ ंलीटर पानी ज्यादा उपलब्ध हो सकेगा।उधर, मेजा बांध से 130 से घटकर 100 लाख लीटर पानी रोजाना वहां से लिया जाएगा।
पानी का गणित
400 लाख
लीटर चम्बल से मिलेगा पानी
100 लाख
लीटर मेजा बांध देगा
513 लाख
लीटर की प्रतिदिन जरूरत
500 लाख
लीटर नियमित मिलेगा
48 घण्टे
में मिलेगा पानी
22 टंकी
में ही डलेगा अभी पानी
513 करोड़
खर्चा हो गया पानी लाने में