प्रोसेस हाउस से निकलने वाले दूषित और केमिकल युक्त पानी से पर्यावरण को हो रहे नुकसान पर जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। ‘राजस्थान पत्रिका’ द्वारा समय-समय पर इस मुद्दे को उठाए जाने और जनप्रतिनिधियों की शिकायतों के बाद जिला कलक्टर जसमीत सिंह संधू ने एक बड़ा आदेश जारी करते हुए उपखण्ड स्तर पर […]
प्रोसेस हाउस से निकलने वाले दूषित और केमिकल युक्त पानी से पर्यावरण को हो रहे नुकसान पर जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। 'राजस्थान पत्रिका' द्वारा समय-समय पर इस मुद्दे को उठाए जाने और जनप्रतिनिधियों की शिकायतों के बाद जिला कलक्टर जसमीत सिंह संधू ने एक बड़ा आदेश जारी करते हुए उपखण्ड स्तर पर विशेष जांच कमेटियों का गठन किया है।
कलक्टर के आदेशानुसार भीलवाड़ा, मांडल, गुलाबपुरा और हमीरगढ़ उपखण्डों में ये कमेटियां सक्रिय रहेंगी। इन क्षेत्रों में प्रोसेस हाउसों की ओर से रात के अंधेरे में या नालों के जरिए जहरीला पानी छोड़ने वालों की खैर नहीं होगी। प्रशासन ने पहली बार जांच प्रक्रिया में पुलिस बल को भी सीधे तौर पर जोड़ा है, ताकि दबिश के दौरान किसी भी प्रकार के विरोध से निपटा जा सके।
राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने रिपोर्ट दी थी कि प्रोसेस हाउस इकाइयों द्वारा दूषित जल की रोकथाम के लिए सख्त निगरानी की जरूरत है। इस मामले में सांसद दामोदर अग्रवाल की अध्यक्षता में हुई बैठक में विधायक अशोक कोठारी, लादूलाल पितलिया और जब्बरसिंह सांखला ने यह मुद्दा प्रमुखता से उठाया था। मांडल विधायक उदयलाल भडाणा ने भी विधानसभा में दूषित पानी से बंजर होती जमीन का मुद्दा उठाया। इसके बाद वन एवं पर्यावरण मंत्री ने आश्वासन दिया था।
प्रदूषण नियंत्रण मंडल के क्षेत्रीय अधिकारी दीपक धनेटवाल ने बताया कि ये कमेटियां अपने-अपने क्षेत्रों में औद्योगिक इकाइयों का समय-समय पर निरीक्षण करेंगी और क्षेत्रवासियों से प्राप्त शिकायतों पर तत्काल जांच करेंगी। जांच रिपोर्ट सीधे जिला कलक्टर को प्रस्तुत की जाएगी, ताकि दोषियों पर बिना किसी देरी के कानूनी कार्रवाई की जा सके।
जांच कमेटी के अध्यक्ष भीलवाड़ा, मांडल, गुलाबपुरा और हमीरगढ़ उपखण्डों के उपखंड अधिकारी होंगे। सदस्य सचिव राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण मंडल के क्षेत्रीय अधिकारी तथा सदस्य के रूप में संबंधित पुलिस उपाधीक्षक, जिला उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक, रीको के वरिष्ठ उप महाप्रबंधक शामिल होंगे। यह कमेटी तुरंत कार्रवाई करेगी।