
पुर के श्मशान घाट मूलभूत सुविधाओं को तरस रहे हैं। पुर लगभग 50 हजार की आबादी का क्षेत्र हैं। श्मशानाें में न टीनशेड है और न अंतिम संस्कार में शामिल लोगों के बैठने की सुविधा है। जिस तरह नगर परिषद व यूआईटी ने शहर के श्मशान घाटों का विकास कराया। पुर के श्मशानाें में उसका एक प्रतिशत भी काम नहीं है। पुर भी नगर परिषद का हिस्सा है। यहां के श्मशान घाटों में कटीली झाड़ियां उगी है।
पुर लगभग 50 हजार की आबादी का क्षेत्र हैं। जहां कई समाजों के श्मशान घाट अलग-अलग बने हैं, लेकिन शहर की तर्ज पर इनका विकास नहीं हो पाया। बिजली व पानी की सुविधा भी नहीं है। लोगों के नहाने के लिए पानी के टैंकर भी खुद के खर्चे से मंगवाने पड़ते हैं। शहर के हर श्मशान पर ट्यूबवेल व पीने के पानी की व्यवस्था की है। श्मशान पर साफ-सफाई व उद्यान की व्यवस्था की गई, लेकिन पुर के श्मशान घाटों में झाड़ियां व बबूल आदि उगे हैं। बैठक के पर्याप्त इंतजामात नहीं है। बारिश में लोगों को काफी परेशानी उठानी पड़ती है। जनप्रतिनिधि इस पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। नगरवासियों ने जिला कलक्टरआशीष मोदी, विधायक विठ्टल शंकर अवस्थी, नगर परिषद सभापति राकेश पाठक, आयुक्क्त नगर परिषद दुर्गा कुमारी, क्षेत्र के चारों पार्षदों को पत्र लिखकर इन समस्याओं का समाधान कराने की मांग की है। लेकिन अभी तक कोई काम नहीं हो सका है। विकास के अभाव में लोगों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। बरसात के दिनों में कई अधिक परेशानी होती है।