पानी के बीच से गुजरता 250 फीट का रास्ता, ओंकारेश्वर से लाई गई है प्राकृतिक प्रतिमा भीलवाड़ा के हलेड़ गांव में आस्था और वास्तुकला का एक अनूठा संगम साकार हुआ है। यहां के प्राचीन आंबा तालाब के बीचों-बीच 50 गुणा 50 फीट क्षेत्र में ग्रेनाइट पत्थर से भगवान भोलेनाथ का भव्य मंदिर बनकर तैयार हो […]
भीलवाड़ा के हलेड़ गांव में आस्था और वास्तुकला का एक अनूठा संगम साकार हुआ है। यहां के प्राचीन आंबा तालाब के बीचों-बीच 50 गुणा 50 फीट क्षेत्र में ग्रेनाइट पत्थर से भगवान भोलेनाथ का भव्य मंदिर बनकर तैयार हो गया है। 21 फरवरी को 15 फीट ऊंचे शिखर के ठीक नीचे जल शंकर महादेव की प्राण-प्रतिष्ठा की जाएगी। करीब डेढ़ फीट ऊंची यह प्राकृतिक प्रतिमा मध्यप्रदेश के ओंकारेश्वर से विशेष रूप से मंगवाई है। मंदिर तक पहुंचने के लिए तालाब के पानी के बीच से 250 फीट लंबा आकर्षक मार्ग बनाया गया है, जिसके दोनों ओर हिलोरें लेता पानी श्रद्धालुओं के आकर्षण का मुख्य केंद्र बना हुआ है।
नवनिर्मित मंदिर में दो दिवसीय प्राण-प्रतिष्ठा समारोह शुक्रवार को उत्साह और उमंग के साथ शुरू हुआ। सुबह 10 बजे गाजे-बाजे के साथ कलश यात्रा निकाली गई। इसमें पूरा गांव उमड़ पड़ा। कालूखेड़ा से निंबार्क आश्रम के महंत मोहन शरण और पूर्व सरपंच लाड देवी आचार्य ने यात्रा को रवाना किया। सिर पर मंगल कलश धारण किए मातृशक्ति और जयकारे लगाते श्रद्धालु तेजाजी के चौक, खाकल देव होते हुए जल शंकर महादेव मंदिर पहुंचे। इसके पश्चात मंदिर परिसर में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हवन कुंड में आहुतियां दी गईं। हलेड़ निवासी बालूराम आचार्य ने बताया कि ग्रेनाइट मंदिर का निर्माण पिछले तीन साल से चल रहा था। शिलान्यास तीन वर्ष पूर्व निंबार्क आश्रम के महंत मोहनशरण के सानिध्य में हुआ था। मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा पूरे गांव के सामूहिक सहयोग से हो रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार प्राचीन तालाब के चारों तरफ पहले आम के बड़े-बड़े पेड़ हुआ करते थे। इसी कारण इसे आंबा का तालाब (आम का तालाब) के नाम से जाना जाने लगा। वर्तमान में इस तालाब की पाल पर तेजाजी, देवनारायण भगवान, हनुमानजी और शीतला माता सहित कई देवी-देवताओं के मंदिर भी स्थापित हैं।