जैसलमेर में आयोजित हो रहे तीन दिवसीय चादर महोत्सव के उपलक्ष्य में रविवार को भीलवाड़ा शहर में भी असीम श्रद्धा और भक्ति का माहौल देखने को मिला। चिंतामणि पारसनाथ महावीर पार्क स्थित भवन में सुबह 11से दोपहर 12:30 बजे तक ‘दादा गुरुदेव इकतीसा’ का संगीतमय पाठ किया गया। इस महोत्सव के निमित्त पूरे भारतवर्ष में […]
जैसलमेर में आयोजित हो रहे तीन दिवसीय चादर महोत्सव के उपलक्ष्य में रविवार को भीलवाड़ा शहर में भी असीम श्रद्धा और भक्ति का माहौल देखने को मिला। चिंतामणि पारसनाथ महावीर पार्क स्थित भवन में सुबह 11से दोपहर 12:30 बजे तक 'दादा गुरुदेव इकतीसा' का संगीतमय पाठ किया गया। इस महोत्सव के निमित्त पूरे भारतवर्ष में एक साथ 1 करोड़ 8 लाख बार इस पाठ का आयोजन कर विश्व शांति और कल्याण की कामना की गई।
इस अवसर पर अभिषेक बम्ब ने दादा जिनदत्त सूरी के जीवन से जुड़े चमत्कारों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि जब दादा गुरुदेव का अग्नि संस्कार हुआ था, तब चमत्कारिक रूप से उनकी मुपती (मुंह पर बांधने वाला वस्त्र), ओघा (रजोहरण) और शॉल अग्नि में भस्म नहीं हुए थे। समाज में ऐसी गहरी आस्था है कि इन पवित्र उपकरणों के प्रक्षाल (धोने के बाद का पवित्र जल) के उपयोग से कई बीमारियों का सफल इलाज होता है। इस कार्यक्रम में अखिल भारतीय खरतरगच्छ युवा परिषद और महिला मंडल के सदस्यों ने पूरे उत्साह के साथ भाग लिया। इस दौरान अरविन्द महात्मा, सौरभ चौधरी, मिथुन जीरावला, कुशल गूगलिया और अंकुर बम्ब, महिला मंडल से रुचि सुराना, नीलम गोलछा, रानी बम्ब, रेखा कोठारी और रेणु महात्मा उपस्थित थी।