भीलवाड़ा

कृषि विभाग की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा: अमृत बना जहर, धरा को कर रहा बीमार

जिले के किसानों के लिए अच्छी खबर नहीं है
3 min read
Disclosed in the Department of Agriculture in bhilwara
Disclosed in the Department of Agriculture in bhilwara

सुरेश जैन. भीलवाड़ा।

जिले के किसानों के लिए अच्छी खबर नहीं है। जो लोग खेती कर रहे हैं उनकी धरा बीमार हो रही है। इससे उत्पादन घट गया है। सबसे बड़ी वजह है कि जो पानी अमृत था, वह जहरीला हो गया है। खासतौर से हमीरगढ़, सुवाणा व मांडल क्षेत्र में बड़ा संकट है। यहां का 78 फीसदी पानी खेती लायक नहीं बचा है।

कृषि विभाग की हालिया जल रिपोर्ट में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। इसमें जिले की तीन तहसीलों को छोड़कर शेष तहसीलों का सिंचाई के लिए काम आने वाला 78 प्रतिशत पानी खराब हो गया है। इसके चलते फसल लेना मुश्किल हो गया है। यहीं स्थिति रही तो सिंचाई के लिए पानी मिलना मुश्किल हो जाएगा।

हालांकि किसान किसी तरह से फसल लेते है, लेकिन अधिक उर्वरक व रसायन का उपयोग ले रहे है जो शरीर के लिए भी नुकसान दायक साबित हो रहा है। कृषि अनुसधान केन्द्र पर पानी की होने वाली जांच में 34 प्रतिशत नमूनों में क्षारीय पाया गया है। 19 प्रतिशत में लवणीय पाया गया है। 25 प्रतिशत पानी के नमूनों में लवणीय एवं क्षारीय पानी पाया गया जो खेती के लिए हानिकारक है।


हमीरगढ़, सुवाणा व माण्डल में हालत विकट

रिपोर्ट के अनुसार, सबसे ज्यादा लवणीय एवं क्षारीय पानी हमीरगढ़, मंगरोप, सुवाणा व माण्डल क्षेत्र में पाया। इन क्षेत्रों में औद्योगिक इकाइयों के दूषित पानी छोडऩे से सिंचाई का पानी खराब हो गया है। पीने का पानी भी नहीं बचा है। पानी में हेवी मेटल्स व केमिकल पाए गए।

हालांकि एेसे पानी की जांच जलदाय विभाग व राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मण्डल करता है। इन क्षेत्रों के सैकड़ों किसानों ने कुओं, बोरिंग के पानी की जांच कराई तो यह स्थिति सामने आई है। मालूम हो, हमीरगढ़ क्षेत्र में उद्योगों की ओर से छोड़े जा रहे काले पानी का स्थायी समाधान नहीं निकला है। अब बरसात का मौसम शुरू हो चुका है। एेसे में रात में काला पानी छोड़ा जाएगा। काले पानी का निस्तारण करना उद्योगों को महंगा पड़ता है।

3 तहसीलों में ही अच्छा
रिपोर्ट में सामने आया कि जहाजपुर में बनास, माण्डलगढ़ व बिजौलिया क्षेत्र में पहाड़ी क्षेत्र व त्रिवेणी संगम होने से 22 प्रतिशत क्षेत्र में पानी सही पाया गया है। हुरड़ा, आसीन्द, कोटड़ी में क्षारीय पानी मिला। यह स्थिति जिले में करीब 900 से अधिक पानी के नमूनों की जांच के आधार पर सामने आया है।

इससे नहीं पनपी फसल
विशेषज्ञों के अनुसार, लवणीय पानी से सिंचाई से मिट्टी में नमक एकत्रित हो जाता है। इससे पौधों में पानी की कमी हो जाती है। देरी से अंकुरण, धीमी वृद्धि, मुरझाने तथा सूखने की समस्या उत्पन्न हो जाती है। कृषि उत्पादन घट जाता है। सोडिक या तेलिया पानी के प्रयोग से मिट्टी का विनिमय सोडियम प्रतिशत बढ़ जाता है। भूमि की ऊपरी सतह पर बारीक पपड़ी बन जाती है। इससे पौधों को समुचित पानी नहीं मिल पाता है। क्षारीय पानी से मिट्टी में क्षारीयता होने के कारण पीएच बढ़ जाता है। नाइट्रोजन, जिंक, आयरन जैसे पोषक तत्व नहीं मिल पाते हैं।

5 रुपए में जांच
कोई भी किसान सिंचाई जल की जांच कृषि विभाग के मृदा प्रयोगशाला में 5 रुपए में करा सकता है। 15 दिन में जांच रिपोर्ट आ जाती है। जिले में मुख्यालय सहित गंगापुर, गुलाबपुरा तथा कोटड़ी में प्रयोगशाला संचालित है।
डॉ. प्रतिभा व्यास, कृषि अनुसंधान अधिकारी

Published on:
05 Jul 2018 05:09 pm
Also Read
View All