इस बार रंगों का महापर्व होली और धुलंडी खगोलीय घटनाओं के अद्भुत संयोग के बीच मनाई जाएगी। 3 मार्च को जब पूरा शहर धुलंडी के रंगों में सराबोर होगा, उसी दिन साल का पहला ‘खंडग्रास चंद्रग्रहण’ भी लगेगा। चूंकि यह ग्रहण भारत में दिखाई देगा, इसलिए इसका धार्मिक और सूतक प्रभाव भी मान्य होगा। पंडित […]
इस बार रंगों का महापर्व होली और धुलंडी खगोलीय घटनाओं के अद्भुत संयोग के बीच मनाई जाएगी। 3 मार्च को जब पूरा शहर धुलंडी के रंगों में सराबोर होगा, उसी दिन साल का पहला 'खंडग्रास चंद्रग्रहण' भी लगेगा। चूंकि यह ग्रहण भारत में दिखाई देगा, इसलिए इसका धार्मिक और सूतक प्रभाव भी मान्य होगा।
पंडित अशोक व्यास के अनुसार 3 मार्च की शाम को लगने वाला यह ग्रहण कुछ राशि वालों के लिए सचेत रहने का संकेत लेकर आ रहा है। वहीं ग्रहण के कारण मंदिरों की दिनचर्या और गर्भवती महिलाओं के नियमों में भी बदलाव आएगा।
3 मार्च को चंद्रग्रहण शाम 5 बजकर 59 मिनट पर शुरू होगा और 6 बजकर 47 मिनट तक रहेगा। हालांकि ग्रहण की अवधि कम है, लेकिन यह भारत के अलावा पूर्वी एशिया, ऑस्ट्रेलिया, प्रशांत महासागर, अमेरिका, रूस और पाकिस्तान जैसे देशों में भी अलग-अलग समय पर दिखाई देगा।
ग्रहण के मोक्ष (समाप्ति) से 9 घंटे पहले सूतक काल शुरू हो जाता है। 3 मार्च को चंद्रग्रहण शाम को है, इसलिए सुबह 9 बजे से ही सूतक लग जाएगा। सुबह 9 बजे शहर के सभी मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाएंगे। शाम 6:47 बजे ग्रहण खत्म होने के बाद मंदिरों की धुलाई और शुद्धिकरण के बाद ही पट खुलेंगे और आरती होगी। सूतक काल में मूर्ति स्पर्श, पूजा-पाठ और भोजन पकाना/खाना वर्जित माना गया है। हालांकि, ग्रहण काल में जप-तप का विशेष महत्व है।
ग्रहण अवधि शाम 5:59 से 6:47 के दौरान गर्भवती महिलाएं घर से बाहर न निकलें और न ही होली खेलें। इस दौरान चाकू, कैंची, सुई आदि का प्रयोग पूरी तरह वर्जित है। भद्रा का साया: होलिका दहन का समय और मुहूर्त तीन साल बाद एक बार फिर होली पर 'भद्रा' का प्रभाव देखने को मिलेगा।व्यास ने बताया कि 2 मार्च को पूर्णिमा तिथि शाम 5:56 बजे से अगले दिन 3 मार्च को शाम 5:08 बजे तक रहेगी। होलिका दहन 2 मार्च को शाम 6:36 बजे तक प्रदोष वेला में या देर रात 1:26 बजे के बाद हो सकेगा। वहीं चंद्रग्रहण 3 मार्च शाम 5:59 से 6:47 बजे तक रहेगा, लेकिन दिन भर धुलंडी पर्व के साथ रंगो का पर्व मनाया जाएगा।