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आंगनबाड़ी केंद्रों के किराए में ‘खेल’: निदेशालय सख्त

प्रदेश में किराए के भवनों में संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों के किराया निर्धारण को लेकर बरती जा रही लापरवाही पर महिला एवं बाल विकास विभाग ने कड़ा रुख अपनाया है। निदेशालय ने स्पष्ट किया है कि कई केंद्रों पर अब भी बरसों पुराना (500, 750 और 1500 रुपए) किराया ही दिया जा रहा है, जबकि नियमतः […]

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'Game' in the rent of Anganwadi centers: Directorate strict

'Game' in the rent of Anganwadi centers: Directorate strict

  • शहरी क्षेत्रों में 4000 रुपए तक मिल सकेगा किराया
  • सुस्त अधिकारियों को कलेक्टर के जरिए चेतावनी

प्रदेश में किराए के भवनों में संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों के किराया निर्धारण को लेकर बरती जा रही लापरवाही पर महिला एवं बाल विकास विभाग ने कड़ा रुख अपनाया है। निदेशालय ने स्पष्ट किया है कि कई केंद्रों पर अब भी बरसों पुराना (500, 750 और 1500 रुपए) किराया ही दिया जा रहा है, जबकि नियमतः शहरी क्षेत्रों में यह राशि 4000 रुपए तक बढ़ाई जा चुकी है।

निदेशालय ने सभी उप निदेशकों और बाल विकास परियोजना अधिकारियों (सीडीपीओ) को अल्टीमेटम देते हुए 'रेंटरीजनेबलनेससर्टिफिकेट' जारी करवाने के निर्देश दिए हैं।

अधिकारियों की सुस्ती से अटका भुगतान

निदेशालय के ध्यान में आया है कि विभाग की ओर से पूर्व में जारी स्पष्ट निर्देशों के बावजूद धरातल पर प्रक्रिया अटकी हुई है। चौंकाने वाली बात यह है कि जिन केंद्रों के सर्टिफिकेट जारी हो चुके हैं, वहां भी सीडीपीओ स्तर से संशोधित दर पर भुगतान नहीं किया जा रहा है। अब विभाग ने साफ कर दिया है कि रेंट असेसमेंट के लिए सार्वजनिक निर्माण विभाग के अभियंताओं के साथ सीडीपीओ खुद विजिट करेंगे और सर्टिफिकेट के आधार पर ही नया किराया तय होगा।

ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लिए अलग नियम

जारी परिपत्र के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए अधिकतम 1000 रुपए और शहरी क्षेत्रों के लिए 4000 रुपए प्रति माह तक किराया देने का प्रावधान किया गया है। जिन स्थानों पर प्रक्रिया में देरी हो रही है, वहां उप निदेशकों को जिला कलक्टर के माध्यम से समन्वय स्थापित कर काम में तेजी लाने को कहा गया है।

अब आगे क्या होगा

अधिकारियों को 20 दिन में रेंट सर्टिफिकेट जारी कर सूचना मुख्यालय भेजने के निर्देश दिए गए है। सार्वजनिक निर्माण विभाग के अधिकारियों के साथ सीडीपीओ खुद केंद्रों का असेसमेंट कराएंगे। नई मानक संचालन प्रक्रिया के अनुसार सभी केंद्रों के नए किराया अनुबंध निष्पादित किए जाएंगे। काम में देरी होने पर जिला कलक्टर हस्तक्षेप कर प्रभावी मॉनिटरिंग सुनिश्चित करेंगे।

  • फैक्ट फाइल
  • - 2148 आंगनबाड़ीकेन्द्र जिले में
  • - 1155 विभागीय भवन में संचालित
  • - 0508 केन्द्र किराए के भवन में
  • - 0485 स्कूलों एवं अन्य जगह संचालित