प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शैक्षणिक गुणवत्ता, गवर्नेंस और राज्य सरकार की प्राथमिकताओं को लेकर जारी की गई ताजा जिला रैंकिंग में चूरू ने बाजी मारी है। 53 के स्कोर के साथ चूरू प्रदेश में पहले पायदान पर रहा है, वहीं झुंझुनू दूसरे और टोंक तीसरे स्थान पर है। खास बात यह है कि इस […]
प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शैक्षणिक गुणवत्ता, गवर्नेंस और राज्य सरकार की प्राथमिकताओं को लेकर जारी की गई ताजा जिला रैंकिंग में चूरू ने बाजी मारी है। 53 के स्कोर के साथ चूरू प्रदेश में पहले पायदान पर रहा है, वहीं झुंझुनू दूसरे और टोंक तीसरे स्थान पर है। खास बात यह है कि इस बार रैंकिंग के मापदंडों (पैरामीटर्स) में बड़ा बदलाव किया गया है। इसका सीधा असर जिलों के स्कोर कार्ड पर नजर आ रहा है।
जारी रैंकिंग के अनुसार टॉप-5 जिलों में चूरू, झुंझुनू, टोंक, सीकर और चित्तौड़गढ़ शामिल हैं। भीलवाड़ा जिले ने बेहतर प्रदर्शन करते हुए 47.5 अंकों के साथ प्रदेश में छठा स्थान हासिल किया है। वहीं, रैंकिंग के सबसे निचले पायदान पर खैरथल-तिजारा (41वां स्थान), बालोतरा (40वां स्थान) और बारां (39वां स्थान) रहे हैं। राजधानी जयपुर 20वें स्थान पर रही है, जिसे सुधार की बड़ी गुंजाइश बताई जा रही है।
शिक्षा विभाग ने इस बार रैंकिंग के लिए 12 कड़े मापदंड तय किए थे। इसमें केवल परीक्षा परिणाम ही नहीं, बल्कि जमीनी हकीकत को भी परखा गया है। अकादमिक में 50 प्रतिशत तय किया है। इसमें छात्र उपस्थिति, बोर्ड परीक्षा परिणाम, और वर्कबुक सुधार को मुख्य आधार बनाया गया। गवर्नेंस के 30 प्रतिशत वेटेज दिया है। अधिकारियों की ओर से स्कूलों के निरीक्षण (विजिट टारगेट) और 'शिक्षक ऐप' पर शिक्षकों की सक्रियता के अंक जोड़े गए। स्टेट प्रायोरिटी 20 प्रतिशत वेटेज के तहत स्कूलों में शौचालय-पेयजल की उपलब्धता और 'शाला स्वास्थ्य' सर्वे के तहत बच्चों की स्क्रीनिंग को प्राथमिकता दी गई।
रैंकिंग का उद्देश्य जिलों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा पैदा करना और शैक्षणिक स्तर में सुधार लाना है। जिन ब्लॉक का प्रदर्शन कमजोर है, वहां विशेष मॉनिटरिंग की जाएगी।
रामेश्वर जीनगर, डीईओ भीलवाड़ा
एक नजर में 'शिक्षा का रिपोर्ट कार्ड'