
भीलवाड़ा. जिले के सरकारी स्कूलों पर दूध का कर्ज चढ़ गया है। सरकार की अन्नपूर्णा दूध योजना के तहत नवंबर २०१८ के बाद से पैसा नहीं आया है। दिसंबर में नई सरकार बनी तो पुरानी सरकार ने भी इससे पहले बजट नहीं भेजा। अब नवंबर के बाद से स्कूलों में दूध का बजट नहीं आया है। नवंबर में भी जिले के अधिकारियों ने कीचनशैड निर्माण के मद से दूध का बिल चुकाया। अब आगामी बजट नहीं आया तो गुरुजी अपनी जेब ढीली कर रहे हैं। जिले में २९११ स्कूलों के दो लाख ६७,७४५ बच्चों को दूध पिलाया जा रहा है। रोज ४५ हजार लीटर दूध की खपत होती है। इसका करीब १८ लाख रुपए भुगतान होता है। मिड डे मील निदेशालय से समय पर बजट नहीं भेजने से गुरुजी की समस्या बढ़ गई है। स्कूलों में बच्चों को दूध नहीं पिलाए तो संकट और अब दूध खरीदने में भी समस्या आ रही है। अधिकांश स्कूलों में संस्था प्रधान स्वयं के स्तर पर दूध का पैसा यह सोचकर चुका रहे हैं कि बजट आएगा तो एडजेस्ट कर लेंगे लेकिन अभी तक दूध का बजट जारी नहीं होने के कारण स्थितियां गंभीर होना शुरू हो गई हैं।
अभी पैसा नहीं है, बाद में ले लेना
सरकारी स्कूलों में दूध वितरित करने वाले समितियां, भीलवाड़ा डेयरी सहित जो भी पशुपालक दूध लाते हैं वे अब पैसा मांग रहे हैं। उन्हें संस्था प्रधान तर्क दे रहे हैं कि अभी बजट आने वाला है, आते ही पैसा चुका देंगे। योजना के तहत जिला मुख्यालय को प्रति तीन महीने का भुगतान एडवांस में करने के आदेश थे। अधिकारियों की उदासीनता का आलम रहा कि एडवांस तो दूर, उल्टा दूध के चक्कर में हजारों संस्था प्रधान कर्जदार बन गए। ग्रामीण क्षेत्रों में दूध देने वाली संस्था का कहना है कि उधार में कब तक दूध देंगे। आखिर हमारा खर्च रोजाना का है।
इसलिए बढ़ गया स्कूलों पर कर्ज
सरकार ने योजना शुरू की थी तब सप्ताह में तीन दिन बच्चों को दूध देने के आदेश थे। शुरू में स्कूलों को सितंबर तक का बजट दिया। सितंबर में सरकार ने योजना का दायरा बढ़ाते इसे पूरे सप्ताह लागू कर दिया। ऐसे में दूध की मात्रा और बिल दुगने हो गए, लेकिन पैसा उतना नहीं डाला। यह कारण भी रहा कि स्कूल दूध के कर्ज में डूबते चले गए। संस्था प्रधानों का कहना है कि जिला स्तर पर दूध के लिए जो बजट की गणना की गई है, वह भी सही नहीं है, क्योंकि जो छात्र संख्या जुलाई में थी, वह अब बढ़ गई है।
कीचनशैड निर्माण के पैसों से चुकाया बिल
नवंबर २०१८ में भी योजना का बजट नहीं आया। अधिकारियों ने कीचनशैड निर्माण के बजट में से ३ करोड़ ८१ लाख रुपए का दूध का भुगतान संस्था प्रधानों को किया। दिसंबर व जनवरी भी निकल गया लेकिन पैसा नहीं आया। अब फरवरी माह भी आधा होने में हैं। पैसा नहीं आने से संस्था प्रधान हाथ खड़े करने लगे हैं।
वर्जन
नवंबर २०१८ में कीचनशैड निर्माण के मद से ३.८१ करोड़ उधार लेकर स्कूलों में दे दिए। अब दिसंबर के बाद से ही अन्नपूर्णा योजना का बजट आना बाकी है। अभी संस्था प्रधान अपने स्तर पर ही व्यवस्था कर रहे हैं। जल्द ही दूध का बजट आ जाएगा।
जगदीश प्रजापति, प्रभारी, मिड डे मील