
भीलवाड़ा। नगरीय विकास एवं स्वायत्त शासन मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने स्पष्ट किया है कि आमजन को राहत देने और शहरों के सुव्यवस्थित विकास के लिए यदि नियमों में संशोधन भी करना पड़े, तो सरकार पीछे नहीं हटेगी। भीलवाड़ा में नगर विकास न्यास व नगर निगम के 'फॉलोअप शहरी सेवा शिविर' का जायजा लेने पहुंचे मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने अधिकारियों की कमी, लंबे समय से अटकी लॉटरी प्रक्रिया, बहुचर्चित तबादला सूची और औद्योगिक भूमि धांधली के आरोपों पर बेबाकी से जवाब दिए। पढ़िए, उनसे हुई बातचीत के प्रमुख अंश।
सवाल: शहरी और फॉलोअप सेवा शिविरों में प्राप्त आवेदनों के निस्तारण की क्या स्थिति है?
खर्रा: शिविरों के माध्यम से ऑनलाइन मिले आवेदनों का प्राथमिकता से निस्तारण किया जा रहा है। जिन प्रकरणों में तकनीकी या व्यावहारिक कठिनाइयां आ रही हैं, उन्हें सरकार के संज्ञान में लाने के निर्देश दिए गए हैं। जरूरत पड़ी तो आमजन की सुविधा के लिए नियमों में बदलाव भी किया जाएगा।
सवाल: नगर विकास न्यास एवं नगर निगम में हाल ही में हुई तबादला सूची और कई अधिकारियों के कांग्रेस शासन से लेकर अभी तक जमे होने पर सवाल उठे है, क्या कहेंगे ?
खर्रा: तबादला सूची का परीक्षण करवाया जाएगा, यदि कोई गलत चयन हुआ है तो आवश्यक कार्रवाई करेंगे।
सवाल : निगम व न्यास में अभियंताओं (एसई व एईएन) के रिक्त पदों पर स्थानीय अधिकारियों को ही लगाए जाने पर सवाल उठे है ?
खर्रा: राज्य सरकार जल्द ही पदोन्नति के रास्ते खोल रही है। इससे रिक्त पदों की समस्या का स्थानीय स्तर पर ही स्थायी समाधान हो जाएगा।
सवाल: चित्तौड़ रोड पर करोड़ों की सरकारी औद्योगिक भूमि के भू-उपयोग परिवर्तन में धांधली के आरोप लग रहे हैं, इस पर क्या एक्शन होगा?
खर्रा: यदि भीलवाड़ा में ऐसा कोई प्रकरण है और इसकी शिकायत मिलती है, तो निश्चित रूप से निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
सवाल: : प्रदेश में निकाय और पंचायत चुनाव कब तक संभावित हैं?
खर्रा: निर्वाचन आयोग और राज्य पिछड़ा आयोग ने राजस्थान उच्च न्यायालय में अपना-अपना शपथ पत्र पेश कर दिया है। चुनाव संपन्न कराने की पूरी जिम्मेदारी राजस्थान निर्वाचन आयोग की है, वे नियमानुसार निर्णय लेंगे।
सवाल: नगर विकास न्यास (यूआईटी) में सचिव का पद खाली है और लॉटरी प्रक्रिया भी अधर में है, इसका समाधान कब तक होगा?
खर्रा: सचिव के रिक्त पद के संदर्भ में मुख्यमंत्री से चर्चा कर जल्द समाधान निकाला जाएगा। जहां तक भूखंड आवंटन लॉटरी का सवाल है, कई मामले न्यायालय में लंबित हैं। विधिक राय ली जा रही है, शीघ्र ही इस दिशा में उचित निर्णय लिया जाएगा।
सवाल: लॉटरी प्रभारी रहे रविश श्रीवास्तव के एपीओ प्रकरण पर आपका क्या कहना है?
खर्रा: पूर्व लॉटरी प्रभारी सहायक अभियंता रविश श्रीवास्तव की पत्नी के नाम भूखंड आवंटन के मामले में नियमों का अध्ययन कराया गया। नए प्रावधानों के अनुसार परिवार के सदस्य द्वारा आवेदन करने पर पूर्व सूचना देना अनिवार्य नहीं है। उन्हें पुनः भीलवाड़ा में लगाने का निर्णय सरकार का है, जो उचित होगा वही किया जाएगा।