भीलवाड़ा

आस्था: 28 साल का ‘वनवास’ खत्म, सांवरिया सेठ ने सुनी अर्जी; पट्टे बहाल हुए तो चढ़ाए चांदी के अफीम डोडे

मेवाड़ में सेठों के सेठ कहे जाने वाले सांवलियाजी के दरबार में सोमवार को आस्था और विश्वास की एक अनूठी तस्वीर देखने को मिली। मलूक दासजी की खेड़ी से आए एक जाट परिवार ने अपनी 28 साल पुरानी मन्नत पूरी होने पर भगवान को चांदी से बने अफीम के डोडे भेंट किए।

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Feb 02, 2026
Faith: 28 years of 'exile' ends, Sanwariya Seth listens to the plea

मेवाड़ में सेठों के सेठ कहे जाने वाले सांवलियाजी के दरबार में सोमवार को आस्था और विश्वास की एक अनूठी तस्वीर देखने को मिली। मलूक दासजी की खेड़ी से आए एक जाट परिवार ने अपनी 28 साल पुरानी मन्नत पूरी होने पर भगवान को चांदी से बने अफीम के डोडे भेंट किए।

श्रद्धालु ओंकार लाल जाट और कालूराम जाट ने बताया कि यह मन्नत उनके परिवार की आजीविका और सम्मान से जुड़ी थी। वर्ष 1995-96 में नारकोटिक्स विभाग ने उनके परिवार के दो अफीम लाइसेंस निरस्त कर दिए थे। उस वक्त मायूस परिवार ने सांवलिया सेठ के दरबार में अर्जी लगाई थी कि जिस दिन उनके पट्टे (लाइसेंस) बहाल होंगे, वे चांदी के अफीम डोडे बनाकर चरणों में अर्पित करेंगे।

तीन दशक का इंतजार और 'सेठ' का चमत्कार

जाट परिवार का कहना है कि उन्होंने उम्मीद नहीं छोड़ी थी। आखिर 28 साल बाद उनकी पुकार सुनी गई। साल 2025 में विभाग ने उनके निरस्त हुए दोनों लाइसेंस बहाल कर दिए। खेती शुरू हुई और पहली फसल घर आई तो परिवार खुशी से झूम उठा। इसी मन्नत को उतारने के लिए सोमवार को पूरा परिवार गाजे-बाजे के साथ सांवलियाजी पहुंचा और चांदी के डोडे भेंट किए।

मंदिर प्रशासन ने किया स्वागत

इस अवसर पर सांवलिया मंदिर मंडल प्रशासन ने भी भक्त की इस अटूट आस्था का सम्मान किया। मंदिर के अधिकारियों ने ओंकार लाल और कालूराम जाट का ऊपरना ओढ़ाकर और प्रसाद भेंट कर स्वागत किया।

क्यों चढ़ाते हैं अफीम के डोडे

मेवाड़-मालवा क्षेत्र में अफीम को 'कालासोना' माना जाता है। किसान अपनी फसल की बुवाई से लेकर कटाई तक सांवलिया सेठ को ही अपना पार्टनर (हिस्सेदार) मानते हैं। मन्नत पूरी होने या अच्छी फसल होने पर यहां अफीम या चांदी के डोडेचढ़ाने की पुरानी परंपरा है।

Updated on:
02 Feb 2026 07:45 pm
Published on:
02 Feb 2026 07:20 pm
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