
भीलवाड़ा।
सरकार भले ही बढ़े समर्थन मूल्य पर उपज खरीद रही है लेकिन इसके कड़े नियम किसानों को खरीद केंद्र पहुंचने में बड़ी बाधा है। किसान मण्डी में अपनी फसल लेकर आने से कतरा रहा है। हालांकि खरीद केन्द्र के प्रभारी का मानना है कि जिले में मूंग की उपज कम हुई है। उसमें कुछ खराबा भी हुआ, लिहाजा किसान नहीं आ रहे है। मूंगफली अभी गीली है इसलिए किसान इसे सरकारी केंद्र पर नहीं ला रहा है। हालांकि खेती बाड़ी के जानकार मान रहे हैं कि समर्थन मूल्य अधिक होने के बावजूद किसानों को अच्छे भाव की उम्मीद नहीं बंधी। वे मान रहे हैं कि खरीद के मापदंड कड़े व पुराने होने से किसान तोल केन्द्र पर आने से कतरा रहे हंै।
जिले में क्रय विक्रय सहकारी समितियों पर खरीद शुरू हो चुकी है। तीन दिन में भीलवाड़ा कृषि उपज मण्डी में मात्र तीन किसान आए, जो उड़द लाए। मूंग का समर्थन मूल्य ६९७५ रुपए प्रति क्विंटल है लेकिन जिले में एक-दो केन्द्र पर ही मूंग की फसल किसान लाए। उड़द को लेकर भी किसानों में उत्साह नहीं है। उनका कहना है कि नियम कठोर होने की फसल केन्द्र पर लेकर आने के बाद भी खाली हाथ या फसल को पुन: लेकर लौटना पड़ सकता है।
दाम अधिक, लेकिन फसल नहीं
सरकार ने मूंग खरीद के लिए सर्वाधिक मूल्य रखा है। जिले में इस बार फसल कम होने के साथ कुछ स्थानों पर बरसात के कारण खराब भी गई थी। नियम जटिल होने के कारण किसान फसल लेकर अभी नहीं आ रहे है। मूंगफली में अभी अधिक नमी है।
रामेश्वर तेली, प्रभारी सरकारी समर्थन केन्द्र भीलवाड़ा
यह है मूंग खरीद के नियम
विजातीय तत्व 2 प्रतिशत
अन्य खाद्यान्न 3 प्रतिशत
क्षतिग्रस्त दाने 3 प्रतिशत
मामूली क्षतिग्रस्त एवं बदरंग दाने 4 प्रतिशत
सिकुड़े और कच्चेदाने 3 प्रतिशत
घूने दाने 4 प्रतिशत
नमी 12 प्रतिशत , इससे अधिक होने पर फसल लौटाई जा सकती है या खरीद नहीं होगी।