टेक्सटाइल सिटी के आस-पास के क्षेत्र में पर्यावरण नियमों की धज्जियां उड़ा रहे ईंट भट्टा संचालकों पर राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने शिकंजा कसा है। आसींद तहसील के नेगड़िया गांव में स्पिनिंग और वीविंग मिलों का कॉटन वेस्ट जलाने के मामले में मंडल ने चार ईंट भट्टों पर 5.20 लाख रुपए की पर्यावरणीय शास्ति […]
टेक्सटाइल सिटी के आस-पास के क्षेत्र में पर्यावरण नियमों की धज्जियां उड़ा रहे ईंट भट्टा संचालकों पर राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने शिकंजा कसा है। आसींद तहसील के नेगड़िया गांव में स्पिनिंग और वीविंग मिलों का कॉटन वेस्ट जलाने के मामले में मंडल ने चार ईंट भट्टों पर 5.20 लाख रुपए की पर्यावरणीय शास्ति (जुर्माना) लगाई है।
क्षेत्रीय अधिकारी दीपक घनेटवाल ने बताया कि लंबे समय से शिकायतें मिल रही थीं कि भट्टा संचालक ईंधन के रूप में कोयले या लकड़ी के स्थान पर टेक्सटाइल उद्योगों से निकलने वाले कचरे (कॉटन वेस्ट) का उपयोग कर रहे हैं। इससे निकलने वाला धुआं न केवल वातावरण को दूषित कर रहा है, बल्कि स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा बना हुआ है।
प्रदूषण मंडल की टीम की ओर से किए गए औचक निरीक्षण और सर्वे में चौंकाने वाली सच्चाई सामने आई। ईंट भट्टों के परिसर में भारी मात्रा में कॉटन वेस्ट पड़ा मिला, जिसे जलाने की तैयारी थी। गौरतलब है कि इस तरह के इंडस्ट्रियल वेस्ट को खुले में जलाना पूर्णतः प्रतिबंधित है।
चौधरी ईंट उद्योग व जुगनू ईंट उद्योग पर 1-1 लाख रुपए, ओम ईंट उद्योग व महालक्ष्मी ईंट उद्योग पर 1.60 -: 1.60 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है।
कार्रवाई केवल जुर्माने तक ही सीमित नहीं रही। नेगड़िया स्थित कमल ईंट उद्योग की ओर से नियमों के विरुद्ध संचालित लोहे की चिमनी को हटाने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग ने इस संबंध में आसींद उपखंड अधिकारी को पत्र लिखकर कार्रवाई के लिए कहा है। मंडल ने संचालक को भी गत दिनो नोटिस थमा दिया था। यदि तय समय में चिमनी नहीं हटाई गई, तो भट्टे को सीज करने जैसी सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
पर्यावरण से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कॉटन वेस्ट जलाने से हवा की गुणवत्ता खराब हो रही है। सभी भट्टा संचालकों को नियमों की पालना सुनिश्चित करनी होगी, अन्यथा उनके खिलाफ और सख्त कदम उठाए जाएंगे।
-दीपक घनेटवाल, क्षेत्रीय अधिकारी, राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण मंडल