भीलवाड़ा

7 हजार कमाने वाले को 30 हजार का लालच, मोबाइल कंपनी कर्मचारी थमाते थे फर्जी सिम

कोतवाली क्षेत्र में सेवानिवृत्त शिक्षिका से ४३.६७ लाख रुपए की ऑनलाइन ठगी के आरोप में हत्थे चढ़े नाइजीरियाई युवक बार्थोलोम्यू ऑडिकपो एवं उसकी नगालैंड निवासी पत्नी रोजलिन आसुमी से पूछताछ में खुलासे से पुलिस भी हैरान है।
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Oct 17, 2019
Greed of 30 thousand to 7 thousand earners, mobile company employees u
Greed of 30 thousand to 7 thousand earners, mobile company employees u

भीलवाड़ा. कोतवाली क्षेत्र में सेवानिवृत्त शिक्षिका से ४३.६७ लाख रुपए की ऑनलाइन ठगी के आरोप में हत्थे चढ़े नाइजीरियाई युवक बार्थोलोम्यू ऑडिकपो एवं उसकी नगालैंड निवासी पत्नी रोजलिन आसुमी से पूछताछ में खुलासे से पुलिस भी हैरान है। वहीं कोतवाली की टीम दिल्ली रवाना हो गई है। वहां गैंग में शामिल अन्य आरोपियों की तलाश करेगी। वहीं सेवानिवृत शिक्षिका से ठगे ४३.६७ लाख रुपए की राशि बरामदगी का प्रयास किया जाएगा।

विदेशी नागरिक होने के बाद भी ठगी के लिए कपड़े की तरह सिम बदलने के तरीके ने पुलिस के सामने चुनौती खड़ी कर दी। पूछताछ में ऑडिकपो ने बताया कि दिल्ली में फर्जी सिम बेचने वाला गिरोह काम कर रहा है। विभिन्न मोबाइल कम्पनियां आमजन को सिम बांटने के लिए कर्मचारियों को छह से सात हजार रुपए पगार पर रखती है। विदेश शख्स एेसे कर्मचारियों से सम्पर्क करता है। उनको दूसरों के नाम पर सिम के लिए २५ से ३० हजार रुपए देते। यह कर्मचारी लालच में आकर ठगों को बड़ी संख्या में दूसरों के नाम पर सिम सौंप देते हैं। बाद में कम्पनी की नौकरी छोड़ दूसरी जगह काम पर लग जाते। पुलिस ने विदेश दम्पती को बुधवार को अदालत में पेश किया। जहां से पांच दिन के रिमांड पर भेज दिया।

एक बार उपयोग, ठगी के बाद तोड़ देते

पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि सोशल साइट पर दोस्ती के लिए सिम का उपयोग कर सम्बंधित महिला को नम्बर देते। एक महीने तक बातचीत करते। विश्वास में लेने के बाद ठगी करते। ठगी के बाद उस सिम का उपयोग नहीं करते थे। उसे तोड़कर बंद कर दिया जाता। एेसे में ठगी की शिकार महिला उस नम्बर पर सम्पर्क करती तो बंद मिलता। यहां तक कि वह मोबाइल भी काम में नहीं लेते थे। उसका सारा रिकॉर्ड डिलीट कर देते थे। ताकि पकड़ में आने के बाद सबूत पुलिस के हाथ नहीं लग पाए। पुलिस भी ठगी का मामला दर्ज करने के बाद उस सिम नम्बर के आधार पर मालिक तक पहुंचती तो फर्जीवाड़े का खुलासा होता। ठग तक पहुंचना कठिन था। नए सिम से नए शिकार की तलाश में विदेशी दम्पती लग जाते थे। अब तक की सिमों की जांच में मुम्बई, दिल्ली, पुणे समेत कई राज्यों के लोगों के नाम की सिम मिली है।

आरोपी ही नहीं जानते पीडि़त की पहचान

आरोपियों ने पूछताछ में अब तक देश में ५० वारदात कुबूली है। हालांकि यह वारदात किसके साथ हुई और पीडि़त को ढूंढऩा भीलवाड़ा पुलिस के लिए बड़ी चुनौती है क्योंकि आरोपियों से मिले मोबाइल के डाटा डिलीट हैं। आरोपियों को भी किस राज्य में किससे ठगी की, पता नहीं। इनका कहना है कि वे खुद जाकर किसी भी महिला से नहीं मिलते थे। महज मोबाइल पर ही बात करते और

खाते में राशि डलवाते थे।
मोबाइल तक तोड़ दिया पकडऩे पर

ऑडिकपो को दिल्ली में जैसे ही पुलिस ने हिरासत में लिया। उनसे अपना मोबाइल जमीन पर दे मारा। मोबाइल टूट गया। पुलिस डाटा पकड़ नहीं पाई। कोतवाली पुलिस उस डाटा को हासिल करने के प्रयास में लगी है।

अंग्रेजी बोलकर फ ंसाना आसान, इसलिए भारत चुना

पुलिस ने नाइजीरियाई युवक से पूछा कि ठगी के लिए भारत ही क्यों चुना? उसका जवाब था-यहां हाई-प्रोफाइल लोगों से अंग्रेजी में बात की जाए तो वे आपको अच्छे से विदेशी समझेंगे या वार्तालाप कर रहे व्यक्ति को हाई-प्रोफाइल समझने लगते हैं। वहीं अन्य देशों में यह करना सम्भव नहीं है और कानून भी कड़े होते हैं। पकड़े गए व्यक्ति से पूछताछ में भाषा आड़े आ रही है। वह महज अंग्रेजी में जवाब दे पाता है। उसकी पत्नी टूटी-फूटी अंग्रेजी बोल पा रही है।

Updated on:
17 Oct 2019 11:50 am
Published on:
17 Oct 2019 11:50 am