https://www.patrika.com/rajasthan-news/
भीलवाड़ा।
प्रशासन अब तक शहर में आवारा मवेशियों की समस्या से लोगों को निजात नहीं दिला पाया है। इसके लिए उपखंड अधिकारी ओमप्रभा ने बैठक भी ली और जन्माष्टमी पर लोगों से गायों को गोद लेने की अपील की, लेकिन इसका असर नहीं हुआ। नगर परिषद की कार्रवाई भी बेअसर रही। अब एक व्यक्ति ने आवारा मवेशियों की समस्या से निजात नहीं दिलाने पर विरोध का अनूठा तरीका खोजा है। शहर के राजेंद्रसिंह राठौड़ ने विरोध दर्ज कराते हुए खुद को कठघरे में बंद कर लिया। राठौड़ का कहना है कि वे अपने आप को असुरक्षित मानते हैं कब कौन सा पशु उन पर हमला कर दे और उन्हें जान गंवानी पड़े। एेसे में उन्होंने अपने आप को इस कठघरे में कैद कर लिया है।
जब तक शहर के आवारा मवेशी काइन हाउस में नहीं जाएंगे, तब तक वे खुद कठघरे में कैद रहकर अपने आप को सुरक्षित रखेंगे। गौरतलब है कि राजस्थान पत्रिका ने कई दिनों से आवारा मवेशियों को लेकर अभियान चला रखा है। शहर के सारे प्रमुख चौराहे इन दिनों आवारा मवेशियों से अटे पड़े हैं। मवेशियों के कारण आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं। हाइवे पर तो वाहन मवेशियों से टकराने से कई लोगों की जान तक जा चुकी है। शहर में भी आए दिन वाहन चालक मवेशियों से टकराकर घायल हो रहे हैं। सब्जी मंडी व बाजारों में तो मवेशी लोगों के हाथ से सामन तक झटक कर ले जाते हैं। हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद प्रशासनिक अधिकारियों ने इन आवारा मवेशियों को सही जगह पहुंचाने को लेकर कार्रवाई नहीं की है।
गोशाला संचालक भी नहीं ले रहे रुचि
जिला प्रशासन एवं नगर परिषद ने पिछले दिनों गोशाला संचालकों की बैठक बुलाकर उन्हें मिल रही सरकारी सब्सिडी का हवाला देते हुए सड़क पर घूमती गायों को ले जाने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद गोशाला संचालक एक भी गाय को अपने यहां नहीं ले गए। प्रशासनिक अधिकारियों की सख्ती नहीं होने से इन मवेशियों के मालिक भी ध्यान नहीं दे रहे हैं।