
पंडेर/ भीलवाड़ा/ जयपुर। थाना पुलिस ने गश्त के दौरान बनास नदी से बजरी भर के आ रहे दो ट्रैक्टर जब्त कर दो जनों को गिरफ्तार किया है। थाना प्रभारी प्रहलाद सिंह ने बताया कि बनास नदी से अवैध रूप बजरी से भरे दो ट्रैक्टर भरणी कलां गांव की तरफ आ रहे थे। दोनों ट्रैक्टर जब्त कर पुलिस थाने ले आई। पुलिस ने चालक शम्भू तेली व दुर्गा लाल माली को गिरफ्तार किया।
खनन माफिया की प्लानिंग के आगे खनन व पुलिस विभाग फेल
खनन माफिया की प्लानिंग के आगे खनन व पुलिस विभाग फेल साबित हो रहा है। खनन व पुलिस की बढ़ती कार्रवाईयों के बीच बजरी माफिया नए-नए हथकंडे अपना रहे है। बजरी माफिया अपने लग्जरी वाहनों के साथ बाइक से अपने वाहन को एस्कोर्ट करते हैं। करीब छह किलोमीटर की दूरी में आगे व पीछे वाहन को त्रिस्तरीय एस्कोर्ट उपलब्य करवाया जाता है। रास्ते में पुलिस मिलने पर बजरी माफिया वाहन चालक को फोन के माध्यम से सावचेत कर देते हैं। इसमें बजरी माफिया लग्जरी वाहनों के साथ बाइक का इस्तेमाल करते हैं। बजरी माफिया व पुलिस की सेंटिंग का खेल फोन के माध्यम से चलता है। यही वजह है कि जयपुर कमिश्नरेट के करीब एक दर्जन थाना इलाकों में होकर बजरी माफिया आसानी से जयपुर शहर तक रात के अंधेरे में आसानी से बजरी पहुंचा रहे हैं। टोंक रोड पर चाकसू, शिवदासपुरा, सांगानेर सदर, सांगानेर व आगरा रोड पर बस्सी, कानोता ट्रांसपोर्ट नगर थाने मौजूद है। बजरी माफिया मुख्य मार्गों के साथ जिन चोर रास्तों का उपयोग करते हैं वे कोटखावदा, तूंगा, खोह नागोरियान, प्रतापनगर थाने इलाके में आते हैं।
फोन से चलता सेटिंग का खेल
पिछले दिनों बनास से बजरी का अवैध खनन कर जयपुर व आसपास के इलाके में बेचने वाले माफिया गिरोह के दो लोगों व एक कांस्टेबल को टोंक के बरौनी थाना पुलिस ने गिरफ्तार किया था। गिरफ्तार कांस्टेबल संदीप यादव जयपुर कमिश्नरेट के शिवदासपुरा थाने में तैनात है। तीनों आरोपी बजरी खनन कर ले जा रहे डंपर को एस्कार्ट कर निकलवाते थे। संदीप बजरी से भरे वाहन के चालक को पुलिस, गश्ती दल, माइनिंग विभाग के अफसरों की लोकेशन बताता था। इस मामले में कांस्टेबल संदीप यादव, नोहटा टोंक निवासी नवल किशोर जाट व बिलवा का बिजेन्द्र को पकड़ा था। ताकि ट्रक व डंपर पकड़ में नहीं आ सके। पूछताछ में सामने आया कि बजरी माफिया पुलिस से फोन के माध्यम से सारी सेटिंग करता था। इसके बाद थाने के सामने व अन्य स्थानों से बजरी माफिया अपने वाहन निकाल ले जाते थे। उसने बताया कि सभी थानों में कुछ इसी प्रकार से बजरी के वाहनों को निकाला जाता है। माफिया अपने गंतव्य पर पहुंच कर बजरी खाली करने के बाद वापस लौटने के दौरान तय राशि पुलिसकर्मी तक पहुंचा देते हैं। इस प्रकार से माफिया जयपुर में बड़ी मात्रा में बजरी सप्लाई कर रहे हैं। जिन बजरी माफियाओं से पुलिस की सेटिंग नहीं बैठती वे पुलिस की चंगुल में फंस कर रह जाते हैं। पुलिस के साथ ही बजरी माफियाओं की खनन विभाग के अधिकारियों से सांठ-गांठ बना रखी है।
चार माह में सत्तर से अधिक वाहनों के खिलाफ कार्रवाई
पिछले चार माह की बात की जाए तो खनन विभाग और पुलिस ने मिलकर सत्तर से अधिक बजरी से भरे वाहन जब्त कर उनके चालकों को अरेस्ट किया है। प्रदेश में लगातार हो रही बजरी के अवैध खनन के बीच पुलिस व खनन विभाग की यह कार्रवाई ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। जयपुर शहर में रोजाना औसतन एक दर्जन से अधिक वाहन बजरी लेकर पहुंच रहे हैं। हाईकोर्ट के आदेशों की पालना करवाने में सरकार पूरी तरह से नाकाम साबित हो रही है। बजरी का अवैध खनन बनास नदी के अलावा चम्बल व माही नदी से हो रहा है। यही नहीं कानोता थाना इलाके की ढूंढ नदी से भी बजरी का अवैध खनन हो रहा है।