
भीलवाड़ा ।
ट्रेडवार के चलते चीनी उद्योग लगातार बन्द हो रहे है। इसका असर देश के टेक्सटाइल उद्योग पर पडऩे लगा है। चीनी उद्योगों के बन्द होने से वहां इंडोनेशिया के कोयले की मांग कम हो गई है। इससे कोयला सौ रुपए टन सस्ता जरूर हुआ है, लेकिन कोयले में नमी होने से यह कोयला 10 प्रतिशत मंहगा पड़ रहा है। भीलवाड़ा के प्रोसेस उद्योग में इंडोनेशिया का कोयला काम में लिया जा रहा है। कोयला सस्ता मिलने लगा है। हालांकि इस कोयले में नमी अधिक होने से महंगा सौदा साबित हो रहा है। उद्योगों को पिलहांल 7700 रुपए टन के दाम है, लेकिन कोयला सूखने के बाद इसके दाम 8000 से 8200 रुपए टन पड़ रहा है।
चीनी उद्योगों के बंद होने से यह सभी उद्योग अब बांग्लादेश, वियतनाम, मैक्सिको, फिलिफाइन्स में स्थापित हो रहे है। इसका फायदा भीलवाड़ा के स्पिनिंग उद्योग को हो सकता है। प्रतिदिन 18 सौ टन कोयले की खपतप्रोसेसे हाइस इन दिनों बडी परेशानी का सामना कर रहे हैं। इण्डोनेसिया कोल को छोड़कर अन्य कोयले के दाम लगातार बढ़ रहे है। इससे खर्चा भी बढ़ रहा है। एक प्रोसेस हाउस में लगभग 50 टन कोयला तथा पांवर प्लांट में लगभग 900 टन कोयले की खपत है।
ऐसे में 18 प्रोसेस हाउस व दो बड़े पांवर प्लॉट में लगभग 1800 टन कोयले की प्रतिदिन की तथा एक माह में लगभग 54 हजार टन कोयले की आवश्यकता होती है। इण्डोनेसिया कोल सौ रुपए टन सस्ता मिल रहा वही अन्य कोयले के दाम लगभग प्रति टन 200 रुपए बढऩे से प्रोसेर्स हाउसों पर अतिरिक्त भार पड़ रहा है।
कोल में आ रही नमी
भीलवाड़ा टेक्सटाइल उद्योग में लगभग 1800 टन कोल की प्रतिदिन की खपत है। इसमें 900 टन प्रोसेस में तथा 900 टन ही संगम के दो व नितिन के पावंर प्लांट में खपत हो रही है। मुख्य रूप से इण्डोनेसिया से ११०० टन कोयला, यूएस से २०० टन कोयला, नागौर से २०० टन लिग्नाइट तथा बाडमेर का ३०० टन लिग्नाइट आ रहा है। इण्डोनेसिया कोयला चीन में जाना बन्द होने से मात्र १०० रुपए टन सस्ता तो हुआ लेकिन नमी से वह महंगा पड़ रहा है। अशोक बाहेती, कोयला व्यापारी
उद्योगों पर पहले से ही जीएसटी मार पड़ रही है। कपड़े का उत्पादन कम हो रहा है। इसके चलते सभी प्रोसेस हाउस अपनी गति से नहीं चल पा रहे है। ऊपर से कोयला मंहगा पड़ रहा है। डाई केमिकल्स तक महंगे हो गए है।
एसके सुराणा, प्रबन्धक सोना प्रोसेस