भीलवाड़ा

महंगाई का ‘बजट टेस्ट’: सब्जी से स्कूल फीस तक भारी, क्या राहत देगा केंद्र

रसोई से लेकर बच्चों के स्कूल तक, महंगाई ने मध्यम और निम्न वर्ग की कमर तोड़ दी है। पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर होने के बजाय ऊपरी स्तर पर बने हुए हैं। इसका सीधा असर परिवहन लागत और हर चीज की कीमत पर पड़ रहा है। केंद्रीय बजट से जनता को ‘जादुई राहत’ की उम्मीद है। […]

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Jan 22, 2026
Inflation's 'budget test': From vegetables to school fees, everything is expensive, will the central government provide any relief?

रसोई से लेकर बच्चों के स्कूल तक, महंगाई ने मध्यम और निम्न वर्ग की कमर तोड़ दी है। पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर होने के बजाय ऊपरी स्तर पर बने हुए हैं। इसका सीधा असर परिवहन लागत और हर चीज की कीमत पर पड़ रहा है। केंद्रीय बजट से जनता को 'जादुई राहत' की उम्मीद है। अगर सरकार प्रत्यक्ष कर में छूट बढ़ाती है और पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने की दिशा में बढ़ती है, तभी आम आदमी को वास्तविक राहत मिल सकती है। पिछले एक साल में दालों की कीमतों में 15-20 प्रतिशत, शिक्षा खर्च में 12 प्रतिशत और स्वास्थ्य सेवाओं में 10 प्रतिशत तक का इजाफा देखा गया है। आम आदमी का बजट टेस्ट अब सरकार के पाले में है। "सब्जी से स्कूल फीस" के इस सफर में जनता को केवल आंकड़ों का मायाजाल नहीं, बल्कि अपनी जेब में बचने वाले चंद रुपयों की चिंता है।

  • ईंधन की कीमतों पर लगाम: यदि सरकार कच्चे तेल पर एक्साइज ड्यूटी कम करे या इसे जीएसटी में शामिल करने की पहल करे, तो माल ढुलाई सस्ती होगी।
  • सप्लाई चेन में सुधार: बजट में कोल्ड स्टोरेज और बेहतर लॉजिस्टिक्स के लिए फंड देने से फसलों की बर्बादी रुकेगी और ऑफ-सीजन में भी कीमतें काबू में रहेंगी।
  • शिक्षा और स्वास्थ्य पर सब्सिडी: निजी स्कूलों की बढ़ती फीस पर लगाम लगाने के लिए शिक्षा क्षेत्र में सरकारी खर्च बढ़ाने की जरूरत है।

जनता को यह है उम्मीद

महंगाई बढ़ रही है लेकिन सैलरी वैसी ही है। स्कूल फीस और बच्चों की पढ़ाई का खर्च हर साल 10-15 प्रतिशत बढ़ जाता है। बजट में इनकम टैक्स की छूट सीमा बढ़नी चाहिए ताकि हाथ में कुछ पैसा बचे जिससे हम बढ़ते खर्चों का मुकाबला कर सकें।

विष्णु बंसल, युवा

डीजल महंगा होने से जुताई और सिंचाई की लागत दोगुनी हो गई है। खाद-बीज के दाम भी आसमान पर हैं। बजट में हमें न केवल फसल का उचित दाम (एमएसपी) मिलना चाहिए, बल्कि खेती के उपकरणों और डीजल पर सीधी सब्सिडी की जरूरत है।

विष्णु शर्मा, व्यापारी

परिवहन महंगा होने से दुकान तक माल पहुंचते-पहुंचते बहुत महंगा हो जाता है। ग्राहक से ज्यादा पैसे लो तो वो नाराज होता है, न लो तो हमें घाटा होता है। बजट में पेट्रोल-डीजल को जीएसटी में लाने का साहस दिखाना चाहिए।

रोहित शर्मा, व्यापारी

कोचिंग फीस से लेकर किताबों तक, सब महंगा है। बाहर रहकर पढ़ाई करना अब मध्यम वर्ग के बस से बाहर हो रहा है। बजट में शिक्षा ऋण पर ब्याज कम करने और छात्रवृत्तियों का दायरा बढ़ाने की उम्मीद है।

प्रशांत सुथार, व्यापारी

पहले 1000 रुपए लेकर बाजार जाते थे तो थैला भर जाता था, अब तो आधा भी नहीं भरता। सब्जी, दूध और गैस सिलेंडर ने घर का बजट बिगाड़ दिया है। बजट में रसोई गैस और खाद्य तेलों पर टैक्स कम होना चाहिए ताकि हम सुकून से दो वक्त की रोटी बना सकें।

सुमन अग्रवाल, गृहणी

Published on:
22 Jan 2026 09:28 am
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