शिक्षा विभाग में तबादला एक्सप्रेस: 12 फरवरी से परीक्षाएं, ऐन वक्त पर स्कूलों की कमान बदली
प्रदेश में 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है, लेकिन शिक्षा विभाग ने ऐन वक्त पर प्रशासनिक सर्जरी कर सबको चौंका दिया है। परीक्षाओं से ठीक एक महीने पहले विभाग ने एक के बाद एक चार सूचियां जारी कर प्रदेश के 412 प्रधानाचार्यों (प्रिंसिपल) के तबादले कर दिए हैं। 12 फरवरी से शुरू होने वाली परीक्षाओं की तैयारियों के बीच हुए इन तबादलों से स्कूलों की प्रशासनिक व्यवस्था चरमरा सकती है। बुधवार को जारी सूची में 18 से अधिक प्रधानाचार्यों के तबादले किए गए हैं।
तबादलों को लेकर सचिवालय से निदेशालय तक पिछले कई दिनों से कवायद चल रही थी। निदेशालय ने सचिवालय से हरी झंडी मिलते ही मंगलवार को सूचियां जारी करना शुरू किया। पहली सूची में 39 प्रिंसिपल बदले गए। दूसरी सूची में 78 प्रिंसिपल्स पर गाज गिरी। तीसरी व चौथी सूची शाम होते-होते 234 और 61 प्रिंसिपल की बड़ी सूचियां जारी की गईं।
तबादलों की इस फेहरिस्त में 'सियासी सिफारिश' और 'शिकायत' दोनों का असर दिखा है। अधिकांश तबादले प्रिंसिपल के स्वयं के आवेदन पर किए गए हैं। इनमें से 50 प्रतिशत से अधिक को एक जिले से दूसरे जिले में भेजा गया है। वहीं कुछ प्रकरणों में शिकायतों के आधार पर अनिवार्य तबादले किए गए हैं। दिलचस्प बात यह है कि करीब दो महीने पहले हुए तबादलों में से कई रसूखदारों ने अपनी सिफारिश के दम पर पुरानी नियुक्तियां निरस्त (कैंसिल) भी करवा ली हैं।
बोर्ड परीक्षाओं के संचालन में प्रिंसिपल की भूमिका सबसे अहम होती है। अब जबकि परीक्षा में मात्र 30 दिन बचे हैं, नए प्रिंसिपल्स के लिए स्कूल का रिकॉर्ड संभालना, प्रैक्टिकल परीक्षाओं का प्रबंधन और परीक्षा केंद्रों की व्यवस्था समझना बड़ी चुनौती होगी। अभिभावकों में भी इस बात को लेकर संशय है कि ऐन वक्त पर कमान बदलने से बच्चों की तैयारी और स्कूल के माहौल पर क्या असर पड़ेगा।
विभाग का यह कदम प्रशासनिक सुदृढ़ीकरण हो सकता है, लेकिन समय को लेकर सवाल उठ रहे हैं। क्या 12 फरवरी से शुरू हो रही बोर्ड परीक्षाओं के बीच प्रिंसिपल का एक जिले से दूसरे जिले में जाना छात्रों के हित में है? सरकार को चाहिए था कि ये फेरबदल परीक्षाओं के बाद किए जाते ताकि शैक्षणिक सत्र प्रभावित न हो।