कलक्टर ने जारी किए आदेश, फूलियाकलां एसडीएम जांच कमेटी में शामिल, मामले की अगली सुनवाई 20 जुलाई को निर्धारित की गई है।
भीलवाड़ा जिले के शाहपुरा और केकड़ी की जीवनदायिनी मानी जाने वाली खारी और मानसी नदियों का सीना चीर रहे खनन माफिया पर अब नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल का चाबुक चला है। अरावली की पहाड़ियों से निकलने वाली इन नदियों के अस्तित्व पर मंडराते खतरे को लेकर एनजीटी की सेंट्रल ज़ोन बेंच भोपाल ने सख्त रुख अपनाने के बाद स्थानीय प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है। एनजीटी के आदेशों की तत्काल पालना करते हुए जिला कलक्टर जसमीत सिंह संधू ने बुधवार को आदेश जारी कर अधिकारी नियुक्त कर दिए हैं।
जिला कलक्टर के आदेश के अनुसार एनजीटी में चल रहे प्रकरण हबीब मोहम्मद बनाम राजस्थान राज्य और अन्य में 17 अप्रेल 2026 को दिए गए निर्णय की अनुपालना सुनिश्चित की जा रही है। कलक्टर संधू ने उपखण्ड अधिकारी फूलियाकलां को एनजीटी की ओर से गठित संयुक्त समिति में अपना प्रतिनिधि नियुक्त किया है। साथ ही इस पूरे मामले में पैरवी और प्रतिरक्षण की कार्रवाई के लिए खनि अभियंता भीलवाड़ा को प्रभारी अधिकारी और समन्वयक नियुक्त किया है।
याचिकाकर्ता फूलियाकलां निवासी हबीब मोहम्मद की ओर से दायर मामले में जस्टिस शिव कुमार सिंह और एक्सपर्ट मेंबर सुधीर कुमार चतुर्वेदी की पीठ ने नदियों में लगातार हो रहे बजरी दोहन पर कड़ी आपत्ति जताई है। एनजीटी ने भीलवाड़ा कलक्टर और राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की एक संयुक्त समिति का गठन कर अगले 6 सप्ताह के भीतर तथ्यात्मक रिपोर्ट और अब तक की गई कार्रवाई का विवरण पेश करने को कहा है। एनजीटी ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि यदि वर्तमान में भी अवैध खनन जारी है, तो भीलवाड़ा कलक्टर इसे तत्काल प्रभाव से रोकें। साथ ही दोषी पाए जाने वालों पर मुकदमा चलाने और पर्यावरणीय मुआवजे की वसूली करने के भी सख्त निर्देश दिए गए हैं। मामले की अगली सुनवाई 20 जुलाई को निर्धारित की गई है।
याचिका में आरोप है कि खनन माफिया की ओर से नदियों के तल को छलनी कर अवैध रूप से वे-ब्रिज और सोलर स्ट्रक्चर खड़े कर दिए गए हैं। 31 जनवरी 2026 को तहसीलदार की मौजूदगी में बनाए गए मौका पर्चा में सीमा स्तंभों को नष्ट करने की पुष्टि हुई थी। अंधाधुंध खनन से भूजल स्तर खतरनाक रूप से गिर रहा है और नदियों का प्राकृतिक प्रवाह पूरी तरह बाधित हो गया है। खारी और मानसी नदियों के संगम स्थल फूलियाकलां का विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है।