खान निदेशालय के आदेश पर एक्शन में खनिज विभाग, जिले में ताबड़तोड़ कार्रवाई
राजस्थान पत्रिका की ओर से जिले में गारनेट (रेत का सोना) के अवैध कारोबार और स्टॉक में फर्जीवाड़े को प्रमुखता से उजागर करने के बाद खनिज विभाग पूरी तरह एक्शन मोड में आ गया है। खान निदेशालय के सख्त आदेशों के बाद स्थानीय खनिज विभाग ने जिले भर में सक्रिय 91 डीलरों की कुंडली खंगालना शुरू कर दिया है। अब तक हुई जांच में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। भौतिक सत्यापन में अधिकांश डीलरों के स्टॉक में भारी गड़बड़ी सामने आई है, जिसके बाद से खदान मालिकों और डीलरों में भारी हड़कंप मचा हुआ है।
अवैध खनन और परिवहन पर नकेल कसने के लिए खनिज विभाग भीलवाड़ा ने सीधे भारतीय खान ब्यूरो (आईबीएम) को पत्र लिखा है। विभाग ने आईबीएम से जिले में पंजीकृत गारनेट डीलरों की सटीक जानकारी मांगते हुए एक बेहद अहम सवाल उठाया है। पत्र में पूछा गया है कि क्या इन डीलरों को रवन्ना या टीपी काटने का कानूनी अधिकार है या नहीं? इस कदम से उन डीलरों की नींद उड़ गई है जो नियमों को ताक पर रखकर बिना अधिकार के ही टीपी काटकर करोड़ों का वारे-न्यारे कर रहे थे।
खान निदेशालय के निर्देश पर गठित विभागीय टीमें जिले में सघन जांच अभियान चला रही हैं। विभाग के राडार पर कुल 91 डीलर हैं। अब तक 35 से अधिक डीलरों के ठिकानों और स्टॉक की भौतिक जांच की जा चुकी है। जांच दल उस वक्त हैरान रह गए जब इनमें से अधिकांश के यहां कागजों में दर्ज स्टॉक और मौके पर मौजूद भौतिक स्टॉक में भारी अंतर पाया गया।
प्रदेश में 200 डीलर हैं जो गारनेट का काम करते हैं। भीलवाड़ा, अजमेर, केकड़ी और उदयपुर की अधिकृत खदानों में हकीकत में माल का उत्पादन ठप सा है, लेकिन अंधाधुंध रवन्ना निकल रहे हैं। अकेले भीलवाड़ा और बिजौलिया में गारनेट के 91 डीलर हैं। इनमें 40 डीलर इस काले खेल के मास्टरमाइंड हैं। अवैध खनन को वैध साबित करने के लिए ये माफिया अन्य राज्यों के फर्जी रवन्ना का इस्तेमाल कर रहे हैं।
खनिज विभाग ने तीन लीजधारकों को अपनी क्षमता से अधिक गारनेट के रवन्ना जारी करने पर नोटिस थमाया हैं। विभाग ने 15 दिन में जवाब मांगा है। जवाब न मिलने पर 4 हजार रुपए प्रति टन के आधार पर 31.26 करोड़ रुपए का जुर्माना वसूला जाएगा।