भीलवाड़ा

प्रभु भक्ति के साथ सुखद बीते जीवन के अंतिम पल, बनाएंगे हॉसपीस केन्द्र जहाजनुमा निर्मित हो रहा जिनालय

जहाजपुर कस्बे में स्वस्तिधाम के रूप में सेवा व भक्ति के नए केन्द्र का विकास
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जहाजपुर कस्बे में श्रीमुनिसुव्रतनाथ दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र स्वस्तिधाम के रूप में राज्य में सेवा व भक्ति के नए केन्द्र का विकास हो रहा है।स्वस्तिधाम में जहाजनुमा विशाल जिनालय का निर्माण भी चल रहा है।

भीलवाड़ा।

जिला मुख्यालय से करीब 90 किलोमीटर दूर जहाजपुर कस्बे में श्रीमुनिसुव्रतनाथ दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र स्वस्तिधाम के रूप में राज्य में सेवा व भक्ति के नए केन्द्र का विकास हो रहा है। जैन धर्म के 20 वें तीर्थंकर भगवान मुनिसुव्रतनाथ की प्रतिमा स्थापित करने के लिए करीब 50 बीघा भूमि में विकसित हो रहे इस स्वस्तिधाम में जहाजनुमा विशाल जिनालय का निर्माण भी चल रहा है। अतिशय क्षेत्र में भक्ति के साथ सेवा का भी संगम होने वाला है। आर्यिका स्वस्तिभूषण माताजी की देखरेख में यहां पूरा कार्र्य हो रहा है।

परिसर में हॉसपीस केन्द्र निर्माण की योजना बनाई गई है। ये राज्य में इस तरह का पहला केन्द्र होगा। इसके तहत 20-25 बैड का केन्द्र स्थापित होगा। इसमें उन लोगो को सेवा के लिए रखा जाएगा जो ब्लड कैंसर सहित विभिन्न गंभीर बीमारियों से पीडि़त होकर जीवन के अंतिम पलों को प्रभु भक्ति के साथ बीताने की चाह रखते होंगे। इसमें रहने वालों की सेवा के लिए लंदन व अहमदाबाद से भी चिकित्सकों का नियमित अन्तराल पर आना होगा। एेसे लोगों को निरन्तर सकारात्मक माहौल प्रदान किया जाएगा ताकि उनके दर्द को बांटा जा सके। भक्ति केन्द्र में आयुर्वेदिक एवं होम्योपैथिक प्रद्धति सेे उपचार का केन्द्र भी स्थापित होगा।

अतिशय क्षेत्र में इस समय जगह-जगह निर्माण कार्य चल रहा है। अतिशय क्षेत्र का प्रमुख आकर्षण जहाजनुमा जिनालय होगा। जिसमें पंचकल्याणक करके तीर्थंकर श्रीमुनिसुव्रतनाथ की प्रतिमा स्थापित होगी। अतिशय क्षेत्र में 100 कक्षों वाली धर्मशाला के साथ भोजनशाला भी होगी। ज्ञानार्जन के लिए पुस्तकालय निर्माण का कार्र्य भी हो रहा है।


महावीर जयन्ती के दिन प्रकट हुई थी प्रतिमा
अतिशय क्षेत्र में स्थापित होने वाली जैन तीर्थंकर श्रीमुनिसुव्रतनाथ की प्रतिमा वर्ष 2013 में 23 अप्रेल को महावीर जयन्ती के दिन जहाजपुर कस्बे में एक मकान में खुदाई के दौरान प्रकट हुई थी।प्रतिमा को बाद में दिगम्बर जैन समाज को सौंप दिया गया। इसके बाद से उसे स्थापित करने के लिए अतिशय क्षेत्र निर्माण का कार्य शुरू हुआ। निर्माणाधीन परिसर में भी प्रतिमा के दर्शनों के लिए पूरे देश के श्रद्धालु पहुंचते है।



आर्यिका स्वस्तिभूषण की प्ररेणा से हो रहा काम
श्रीमुनिसुव्रतनाथ की प्रतिमा निकलने के बाद से अतिशय क्षेत्र निर्माण का पूरा कार्य आर्यिका स्वस्तिभूषण की प्रेरणा से हो रहा है। आर्यिका प्रतिमा निकलने के कुछ समय बाद जहाजपुर पहुंचने के बाद से अब तक वहीं प्रवासरत है। वे निरन्तर अतिशय क्षेत्र निर्माण से जुड़े कार्यों के लिए मार्गदर्शन प्रदान करती है। हॉलाकि निर्माण की देखरेख का पूरा कार्य मंदिर ट्रस्ट ने संभाल रखा। इसके अध्यक्ष हरिद्वार के जौहरीलाल जैन है जो नियमित रूप से यहां पहुंच निर्माण कार्यों की देखरेख करती है।



घोषित हो पवित्र क्षेत्र
आर्यिका स्वस्तिभूषण माताजी के अनुसार हमारा सपना यहीं है कि ये अतिशय क्षेत्र देश में सेवा व भक्ति का विशेष केन्द्र बने। सरकार इस क्षेत्र को पवित्र क्षेत्र घोषित करने के साथ इसे धार्मिक पर्यटन स्थल घोषित करें,ताकि विकास बेहतर तरीके से हो सके। गंभीर बीमारियों से पीडि़तों के अंतिम पल सुखद बीते इसके लिए हॉसपीस केन्द्र बनाएंगे।

Published on:
02 Oct 2017 02:12 pm