
Meja Bandh भीलवाड़ा में मेजा बांध की दोनों नहरों से सिंचाई के लिए छोड़ा जा रहा पानी आखिर रोक दिया गया। जल संसाधन विभाग अब किसानों की मांग पर ही फिर से नहर खोलेगा।
मेजा बांध की नहरों से छोड़े जा रहे पानी के मोरी व टेल तक पहुंचने के बजाए खेतों में घुसने, रास्ते में फैलने, जनजीवन को खतरे में डालने एवं पानी वितरण व्यवस्था पर निगरानी नहीं होने के राजस्थान पत्रिका के खुलासे के बाद जिला प्रशासन एवं जल संसाधन विभाग ने गंभीरता दिखाई। जल संसाधन विभाग ने जिला प्रशासन के निर्देश पर पानी वितरण व्यवस्था की समीक्षा की। अपनी टीमों को क्षेत्रों में दौड़ाया। इसके बाद रविवार शाम एक के बाद एक दोनों नहरों में पानी छोड़ना बंद कर दिया।
रिसाव ठीक कराए, फिर की समीक्षा
अधीक्षण अभियंता सीएल कोली ने बताया कि सरपंचों व जनप्रतिनिधियों की शिकायतें एवं राजस्थान पत्रिका में प्रकाशित समाचारों के आधार पर वितरण व्यवस्था की समीक्षा की। विभागीय टीमों को पांसल समेत कई गांवों में भेजा। पांसल में मिले रिसाव को बंद कराया गया। जल वितरण कमेटी से चर्चा हुई। इसके बाद रविवार को मेजा बांध की दोनों नहरों से छोड़ा जा रहा पानी बंद कर दिया। किसानों की जरूरत के मुताबिक अब बाद में नहरों से पानी छोड़ा जाएगा।
यह रहा बड़ा असर
मेजा बांध से पानी छोड़े जाने से पहले राजस्थान पत्रिका ने 17 नवम्बर के अंक में भीलवाड़ा शहर के लिए आफत ना बन जाए मेजा बांध का पानी शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया। इसके बाद से लगातार नहरों के खस्ताहाल एवं पानी छोड़े जाने से पानी की बर्बादी एवं खाद व बीजों के नुकसान एवं ग्रामीणों की पीड़ा को राजस्थान पत्रिका ने प्रमुखता से उठाया। इसका बड़ा असर यह रहा कि विभागीय अधिकारी जागे। क्षतिग्रस्त नहरों की सुध ली, पांसल में रिसाव ठीक कराया। सरपंच व स्थानीय जनप्रतिनिधि भी जागरूक हुए और विभाग के खिलाफ आवाज उठाई। अंतत: जलसंसाधन विभाग ने मेजा बांध के पानी को नहरों में छोड़ने से रोक दिया।